
इन चुनाव में इस जाति को इतने मिले टिकट
ओमप्रकाश शर्मा
जयपुर. चुनाव में जाति ऐसा फैक्टर है, जो अक्सर विकास जैसे मुद्दों पर हावी रहता है। इसी प्रभाव को भुनाने के उद्देश्य से वर्तमान चुनावों से पहले प्रदेश में सामाजिक संगठन सक्रिय हुए थे। समाज का प्रभाव दिखाने के लिए राजधानी जयपुर में संख्या बल के आधार पर शक्ति प्रदर्शन किया गया। हर समाज की प्रमुख मांग रही कि उनके लोगों को राजनीतिक दल अधिक तवज्जो दें। इन महासभा और रैलियों के मंच पर राजनीतिक पार्टी के प्रतिनिधि भी पहुंचे थे। जब टिकट देने का नम्बर आया तो इन आयोजनों का प्रभाव नहीं दिखा। टिकट उसी फार्मूले पर वितरित हुए जैसे पहले होते आए थे। टिकट वितरण के समय जाति फैक्टर को हर पार्टी पहले भांपती है। इस बार भी उसी जाति विशेष को तवज्जो ज्यादा मिली, जिसकी संख्या अधिक है। इसके अलावा अगर काम आई तो हर नेता की व्यक्तिगत पकड़। प्रमुख पार्टियों ने जो टिकट दिए हैं, उनकी गत चुनावों से तुलना करें तो ज्यादा अंतर नहीं है। एक से अधिक चुनावों की तुलना करें तो सामने आता है कि समाज के मुताबिक टिकटों की संख्या में ज्यादा अंतर नहीं रहता।
उल्लेखनीय है कि जयपुर में 5 मार्च को जाट महाकुंभ, 19 मार्च को ब्राहण महापंचायत, 2 अप्रेल को केसरिया महपंचायत, 21 मई को कुमावत महापंचायत, 20 अगस्त को विराट वैश्य महापंचायत, 3 सितंबर को ब्राह्मण महासंगम व विश्वकर्मा महाकुंभ व 17 सितंबर को विराट वैश्य महापंचायत आयोजित हुई थी।
कुछ संख्या बढ़ी है, लेकिन हमें हमारा हक नहीं मिला
जनसंख्या अनुपात में 40-40 टिकट देने थे। कुछ जगह तो हमें ऐसे स्थान पर टिकट दिया जहां समाज के वोट अपेक्षाकृत कम हैं।
राजाराम मील, अध्यक्ष जाट महासभा
उम्मीद के मुताबिक नहीं मिले टिकट
हमें दोनों पार्टियों से 25-25 टिकट मिलने की उम्मीद थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। जहां हमारे समाज के मतदाताओं की संख्या अधिक थी, वहां भी टिकट नहीं मिला।
- सुरेश मिश्रा, अध्यक्ष सर्व ब्रह्मण महासभा
महापंचायत में वैश्य समाज के लिए जितनी टिकट मांगी गई थी, उतनी नहीं दी गई। दोनों पार्टी से यही उम्मीद थी कि संख्या के हिसाब से राजनीति में प्रतिनिधित्व मिले। जयपुर से भी एक टिकट कम हो गया।
-प्रदीप मित्तल, समारोह अध्यक्ष, विराट वैश्य महापंचायत
-डॉ. अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी राजस्थान जयपुर द्वारा अन्य सभी सामाजिक संगठनों के साथ अप्रेल में अनुसूचित जाति एवं जनजाति महापंचायत का आयोजन किया था। इसमें केंद्र व राज्य सरकार से जनगणना वर्ष 2011 के अनुसार अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सरकारी सेवाओं में एवं शिक्षण संस्थानों एवं अन्य योजनाओं में आबादी के अनुपात में आरक्षण बढ़ाने की प्रमुख मांग रखी गई थी। अभी तक मात्रा कांग्रेस ने इस मुद्दे को अपने घोषणा पत्र में शामिल करने का आश्वासन दिया है।
-जी एल वर्मा, महासचिव डॉ अम्बेडकर मेमोरियल वेलफेयर सोसायटी राजस्थान
-हमारी मांग यह थी कि राजनीति व अन्य क्षेत्र में आरक्षण जनसंख्या के अनुपात में 16 प्रतिशत से बढ़ा कर 18 प्रतिशत किया जाए। जबकि ऐसा किया नहीं गया।
-भंवर मेघवंशी, सह संयोजक अनुसूचित जाति अधिकार अभियान राजस्थान
Updated on:
16 Nov 2023 12:48 pm
Published on:
16 Nov 2023 12:48 pm
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