Rakhi Hajela
खरबूजे को देखकर खरबूजा रंग बदलता है यह कहावत तो आपने सुनी होगी लेकिन ऐसा कुछ नहीं होगा। खरबूज अपना रंग तो नहीं बदलेगा लेकिन उसका स्वाद बढ़ेगा मिठास अधिक होगी और अधिक समय तक स्टोर किया जा सकेगा। कुछ ऐसा ही होगा तरबूज के साथ। दुर्गापुरा स्थित कृषि अनुसंंधान संस्थान में इन दोनों फलों की नई प्रजाति विकसित की जा रही है जो जल्द ही मार्केट में उपलब्ध होगी।
गौरतलब है कि तरबूज की दो किस्मों दुर्गापुरा केसर और दुर्गापुरा लाल और खरबूजे में दुर्गापुरा मधु की मिठास और स्वाद को देश भर में काफी पसंद किया जाता रहा है लेकिन समय के साथ मिट्टी पानी में हो रहे बदलाव से इनकी मिठास अब पहले जैसी नहीं रही थी और इनका आकार भी काफी बड़ा था, इन्हें अधिक समय तक रखना भी संभव नहीं था।
क्रॉस ब्रीडिंग से मिलेगी नई किस्म
अनुसंधान संस्थान क्रॉस ब्रीडिंग के जरिए इन फलों की उन्नत किस्म विकसित कर रहा है ।इसके लिए आईआईएचआर बंैगलोर और क्षेत्रीय शुष्क बागवानी संस्थान जोधपुर से कुछ खास किस्मों के बीज मंगवा कर लगवाए हैं। जिनके साथ केसर,लाल और मधु की क्रॉस ब्रीडिंग करवाई जाएगी।
यह होगा फायदा
आमजन की डिमांड को ध्यान में रखते हुए इनका आकार आइस बॉक्स साइज के रूप में होगा। आमतौर पर अब कोई भी व्यक्ति आठ से दस किलो का एक फल लेना पसंद नहीं करता। ऐसे में आइस बॉक्स साइज की नई किस्म विकसित हो रही है। इसमें मिठास अधिक होगी और लंबे समय तक खराब नहीं होने के कारण इन्हें दूसरे राज्यों में भी भेजा जा सकेगा।
इनका कहना है,
संस्थान में हम नई किस्म विकसित कर रहे हैं जो जल्द ही मार्केट में होगी। अभी जो किस्में थी उनमें मिठास तो थी लेकिन उन्हें एक या दो दिन से अधिक नहीं रखा जा सकता था लेकिन नई वैरायटी को अधिक समय तक स्टोर किया जा सकेगा।
डॉ. उदय सिंह,, एसोसिएट प्रोफेसर कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा।
दुर्गापुरा लाल, केसर और मधु की नई किस्में विकसित करने के लिए हम क्रॉस ब्रीडिंग तकनीक पर काम कर रहे हैं। अच्छे परिणाम सामने आए हैं। जल्द ही आमजन को बेहतर किस्म मिलने वाली है।
डॉ योगेश शर्मा, सहायक आचार्य
कृषि अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुरा।