
सैटेलाइट सिस्टम से पूरे देश में टोल वसूलने की तैयारी
जयपुर
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सहयोग से केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय अब सैटेलाइट सिस्टम से पूरे देश में टोल वसूलने की तैयारी कर रहा है। इसके परीक्षण के लिए एक लाख 37 हजार गाड़ियों में सैटेलाइट नेवीगेशन टोलिंग सिस्टम लगा दिया गया है। बहुत जल्द यह सिस्टम पूरे देश में लागू कर दिया जाएगा।
जर्मनी में इस तरह से 90 फीसदी गाड़ियां चल रही हैं। रूस में पहले से 100 फीसदी गाड़िया सैटेलाइट टोल सिस्टम पर चल रही हैं। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि आप जितना हाइवे पर चलेंगे उतना ही टैक्स देना होगा। नेशनल हाइवे टोल किसी सेक्टर का नहीं बल्कि प्रति किलोमीटर के अनुसार लिया जाएगा।
अब टोल पार करने के बाद अब अगर आप दो किलोमीटर चलेंगे तो दो किलोमीटर का ही पैसा देना होगा। पहले आपको पूरे 50 किलोमीटर के सेक्टर का देना होता था। वहीं अब बिना टोल दिए कोई भी हाइवे पर नहीं चल पाएगा। पहले टोल नहीं पड़ने पर कई लोग टोल से बच जाते थे।
सबसे बड़ा मसला यह होगा कि टोल प्लाजा पर अपने पद का रौब झाड़ने वालों से भी मुक्ति मिल जाएगी। गौरतलब है कि हर समय ही देश के किसी न किसी हिस्से पर टोल कर्मियों से उलझने की तस्वीरें रोजाना ही सामने आते रहती थी। यानी अब सबका कटेगा—टोल।
गडकरी का ड्रीम,प्लाजा मुक्त हाइवे
इसे लेकर परीक्षण शुरू हो चुका है। पिछले साल केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एसोचैम की बैठक में इस बात की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि 2 साल में पूरे देश की टोल वाली सड़कों को प्लाजा से मुक्त करते हुए जीपीएस से जोड़ कर सीधे टोल व्यवस्था को खत्म कर दिया जाएगा।
होगी समय की बचत
डिजिटल इंडिया और ई गवर्नेन्स की दिशा में केंद्र सरकार का यह अत्याधुनिक तरीका हाईवे पर सफर का अनुभव बदलने वाला साबित होगा। वहीं लोगों का मूल्यवान समय भी बचेगा। सीधे सेटेलाइट के डाटा से गाड़ी का टोल वाहन मालिक के अटैच एकाउंट से लिया जाएगा।
जीपीएस ट्रैकिंग अनिवार्य
अब टोल को हटाने के बाद टोल पर लगने वाली लाइन और टोल प्लाजा के रखरखाव से जुड़े खर्च भी गुजरे जमाने की बात हो जाएगी। पुराने वाहनों में जीपीएस अनिवार्य रुप से लगाया जाएगा जबकि नए वाहन पहले ही इस सुविधा से लैस है। इससे वाहनों की चोरी का मसला भी खत्म हो जाएगा।
Published on:
05 Apr 2022 05:47 pm
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