
Rajasthan High Court
राजस्थान हाईकोर्ट (Rajasthan High Court) ने जयपुर स्थित टाउन हॉल और होमगार्ड कार्यालय परिसर के कब्जे को लेकर पद्मिनी देवी (Padmini Devi) व अन्य की अपीलों को खारिज कर राज्य सरकार को राहत दी है। कोर्ट ने इस मामले में दखल से इनकार करते हुए कहा कि संपत्ति सरकारी उपयोग के लिए दी गई थी और कोवेनेंट (संविधान के अंतर्गत समझौते) में किसी विशिष्ट उद्देश्य का उल्लेख भी नहीं है। इसके अलावा संपत्ति तीसरे पक्ष (अन्य किसी) को दी भी नहीं जा रही है।
कोर्ट के इस आदेश से टाउन हॉल परिसर (Town Hall Complex) में म्यूजियम के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है, वहीं अन्य संपत्ति का भी दूसरे सरकारी कार्य में उपयोग हो सकेगा। न्यायाधीश नरेंद्र कुमार ढड्ढा ने शुक्रवार को जयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य पद्मिनी देवी, दीया कुमारी (Diya Kumari) व पद्मनाभ सिंह (Padmanabh Singh) की दो अपीलों को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने इस मामले में 7 अगस्त को दोनों परिसरों को लेकर यथास्थिति के बनाए रखने का आदेश दिया था, जो अपीलों के खारिज होने के साथ ही समाप्त हो गया। हाईकोर्ट ने इस मामले में पिछले दिनों सुनवाई पूरी कर फैसला सुरक्षित रख लिया था।
कोर्ट ने कहा कि यह संपत्ति सरकारी उपयोग के लिए दी गई थी और सरकारी उपयोग का अर्थ व्यापक है। अपीलार्थी पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने कहा कि कोवेनेंट में टाउन हॉल व जलेब चौक स्थित लेखाकार कार्यालय परिसर को निजी संपत्ति मानते हुए सरकारी उपयोग के लिए इन्हें लाइसेंस पर दिया गया था। यह संपत्ति सिटी पैलेस का हिस्सा थी। पहले टाउन हॉल को विधानसभा के लिए उपयोग में लिया जा रहा था, अब सरकार यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर का म्यूजियम बनाना चाहती है।
इसी तरह लेखाकार व अन्य कार्यालय को दी गई संपत्ति का होमगार्ड कार्यालय के लिए उपयोग हो रहा था, लेकिन अब उसके लिए भी इस सम्पत्ति की जरूरत नहीं रही है। उद्देश्य पूरा होने के कारण लाईसेंस समाप्त हो गया है और कोवेनेंट के अनुरूप संपत्ति के स्वरूप में बदलाव भी नहीं किया जा सकता, ऐसे में अब कब्जा अपीलार्थी पक्ष को वापस दिलाया जाए। मालिकाना हक को लेकर प्रकरण लंबित होने के कारण सरकार को यहां किसी अन्य कार्य के लिए करोड़ों रुपए का धन खर्च करने से रोका जाए।
वहीं, आमेर विकास एवं प्रबंध प्राधिकरण की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक मेहता व अधिवक्ता मुकेश जोशी तथा राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राजेश महर्षि ने कहा कि कोवेनेंट में संपत्ति सरकार को देने के बारे में लिखा है। संपत्ति कोई सीमित समय के लिए नहीं दी गई। कोवेनेंट में लाइसेंस का प्रावधान नहीं हो सकता और कोवेनेंट को कोर्ट में चुनौती भी नहीं दी जा सकती। सरकार को यह संपत्ति सार्वजनिक कार्य में उपयोग के लिए दी गई और सरकार का यह मकसद कभी पूरा हो ही नहीं सकता। अपीलार्थी उपयोग के बदले पैसे की मांग कर रहा है, ऐसे में अपीलार्थी के पक्ष में स्टे नहीं दिया जा सकता।
Published on:
15 Sept 2023 10:31 pm

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