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सत्य ही भगवान, सत्य ही जीवन का सार, आचार्य भिक्षु के 301वें जन्मोत्सव पर गदग में गूंजा सत्य, साधना और संयम का संदेश

जयपुर

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Newsdesk

Jul 28, 2026

Rajasthan

गदग. तेरापंथ भवन में तेरापंथ धर्मसंघ के प्रवर्तक आचार्य भिक्षु का 301वां जन्मोत्सव तथा 269वां बोधि दिवस श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुनि डॉ. आलोक कुमार के नेतृत्व में नमस्कार महामंत्र के सामूहिक जाप से हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए उन्होंने आगम का सूत्र "सच्चं भयवं, सच्चं लोयम्मि सारभूयं" उद्धृत करते हुए कहा कि सत्य ही भगवान है और सत्य ही संसार का वास्तविक सार है। उन्होंने कहा कि आचार्य भिक्षु सत्य के महान साधक और सत्य की खोज में जीवन समर्पित करने वाले युगद्रष्टा थे। उनका उद्देश्य नया पंथ स्थापित करना नहीं, बल्कि सत्य के मार्ग पर चलना था और इसी सत्य साधना से तेरापंथ धर्मसंघ का उदय हुआ। मुनि डॉ. आलोक कुमार ने कहा कि निर्भय, निर्मोही, अनासक्त और अनाग्रही व्यक्ति ही सत्य की वास्तविक साधना कर सकता है। चातुर्मास आत्मसंयम, आत्मचिंतन और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ अवसर है, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन को धर्ममय बनाने का प्रयास करना चाहिए। इस अवसर पर मुनि हिमकुमार ने अपनी प्रेरक गीतिका के माध्यम से आचार्य भिक्षु के आदर्शों को भावपूर्ण ढंग से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि आचार्य भिक्षु ने मन, शरीर, भाव, इंद्रियों और चिंतन पर विजय प्राप्त कर आदर्श साधना का मार्ग दिखाया। उन्होंने श्रद्धालुओं से चातुर्मास के दौरान तप, संयम, सहनशीलता और लक्ष्य के प्रति सजगता अपनाकर आत्मविकास का संकल्प लेने का आह्वान किया। कार्यक्रम में महिला मंडल की सदस्यों ने मंगलाचरण एवं गीतिका संगान प्रस्तुत कर आध्यात्मिक वातावरण को और अधिक भक्तिमय बना दिया।