
Heart Transplant and Organ Donation
जयपुर। उम्र कभी मानवता के बड़े फैसलों में बाधा नहीं बनती। इस बात को साकार किया है 87 वर्षीय उमराव जैन ने। सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित की गईं सिविल लाइंस निवासी दिवंगत उमराव जैन की ओर से किया गया कैडेवरिक अंगदान राजस्थान के लिए ऐतिहासिक बन गया है। वे प्रदेश की अब तक की सबसे वरिष्ठ अंगदाता बनी हैं। उनके परिजनों की सहमति से किए गए इस अंगदान से दो गंभीर रूप से बीमार मरीजों को नया जीवन मिल सका।
रविवार सुबह परिजनों ने अत्यंत संवेदनशील और साहसिक निर्णय लेते हुए अंगदान की अनुमति दी। दिवंगत अंगदाता का लिवर महात्मा गांधी अस्पताल में 60 वर्षीय एक रोगी में प्रत्यारोपित किया गया। यह जटिल लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. नैमिष एन एन. मेहता के नेतृत्व में किया गया। उनकी टीम में हिपेटोलॉजिस्ट डॉ. विनय महला, डॉ. विवेक आनंद सारस्वत, डॉ. करण कुमार, डॉ. देवेंद्र चौधरी, डॉ. अनिल गुप्ता तथा ट्रांसप्लांट एनेस्थेटिस्ट डॉ. गौरव गोयल और डॉ. कौशल सिंह बघेल शामिल रहे। चिकित्सकों ने बताया कि ट्रांसप्लांट सफलतापूर्वक संपन्न हुआ है और मरीज की स्थिति में सुधार है। अंगदाता की दोनों किडनी का सफल प्रत्यारोपण महात्मा गांधी अस्पताल की किडनी ट्रांसप्लांट टीम ने किया। इस टीम में डॉ. टी.सी. सदासुखी, डॉ. नृपेश सदासुखी, डॉ. सूरज गोदारा, डॉ. विपिन गोयल सहित अन्य चिकित्सक शामिल थे। यह प्रत्यारोपण हीरापुरा-भांकरोटा क्षेत्र, जयपुर निवासी एक रोगी में सफलतापूर्वक किया गया। अस्पताल प्रबंधन और मोहन फाउंडेशन के समन्वय से यह पूरा दधीचि प्रयास संपन्न हुआ।इस अवसर पर अस्पताल स्टाफ ने दिवंगत अंगदाता को श्रद्धांजलि अर्पित की। सुरक्षाकर्मियों ने पार्थिव अंगदाता को गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। मोहन फाउंडेशन की भावना जगवानी और डॉ. गोविंद गुरबानी सहित अन्य पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
Updated on:
02 Feb 2026 09:48 am
Published on:
02 Feb 2026 09:48 am
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
