
जयपुर। मुहाना मंडी में पिछले सप्ताह शुरू की गई पार्किंग शुल्क की व्यवस्था तूल पकड़ती जा रही है। मंडी के गेट नंबर दो पर बुधवार को दूध की डेयरी के एक वाहन का पार्किंग शुल्क लेने पर झगड़े की नौबत आ गई। आसपास के किसानों ने पार्किंग कर्मचारियों से झगड़ा किया। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने समझाइश की। बाद में मंडी समिति के कार्यालय में सभी संघों के लोग पहुंचे और उन्हें तत्काल रूप से शुल्क नहीं लेने के लिए कहा। संयुक्त संघर्ष समिति ने पार्किंग ठेका निरस्त करने की मांग की।
मंडी में पार्किंग शुल्क को लेकर व्यापारिक संगठन और मंडी समिति आमने-सामने हैं। इसके मद्देनजर ज्योतिबा फुले टर्मिनल मार्केट मुहाना मंडी में संयुक्त संघर्ष समिति की बैठक आयोजित हुई। पार्किंग ठेके को निरस्त करने की समिति ने मांग उठाई। मंडी में कार्य करने वाले सब्जी, आलू-प्याज, फल, केला आढ़तिया, माशाखोर, स्थानीय किसान, पिकअप लोडिंग यूनियन और ई-रिक्शा यूनियन लामबंद हैं। मंडी यार्ड में काम करने वाले प्रभावितों में डर है कि पार्किंग ठेके से उनके व्यापार पर विपरीत असर पड़ेगा। मांग नहीं मानने पर मंडी को बंद करने की चेतावनी भी दी गई।
मंडी की ओर से हर साल 40 करोड़ रुपए से अधिक का टैक्स दिया जाता है। मूलभूत सुविधाओं को चाक-चौबंद की बजाय मंडी में पार्किंग शुल्क की व्यवस्था से व्यापारियों में आक्रोश है। व्यापारी देवेंद्र जैन और इंद्रकुमार सैनी ने बताया कि पार्किंग जैसे बोझ को सभी पक्षों पर डाल दिया गया, यह गलत है। इमरान कुरैशी ने कहा कि मंडी समिति प्रॉपर मॉनिटरिंग करें तो सब व्यवस्थित हो सकता है।
जयपुर फल व सब्जी थोक विक्रेता संघ के अध्यक्ष योगेश तंवर और फ्रूट मंडी अध्यक्ष गोविंद चेलानी ने कहा कि पार्किंग ठेका सिर्फ निजी स्वार्थ के लिए दिया गया है। आलू-प्याज मंडी विक्रेता संघ के मदन शर्मा और व्यापारी कैलाश फाटक ने कहा कि टेंडर प्रक्रिया भी पारदर्शी नहीं थी।
Updated on:
27 Mar 2025 07:51 am
Published on:
27 Mar 2025 07:47 am
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