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वैरिकोस नसों की एक गंभीर समस्या, तत्काल उपचार की आवश्यकता

Varicose Veins : जयपुर . Varicose Veins में एक Common Condition है जो लगभग 5 प्रतिशत Indians को प्रभावित करती है। खासकर Urban Lifestyle जी रहे भारतीयों के बीच इस स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि अक्सर काम के दौरान उन्हें लंबे समय तक बैठे रहना होता है, Obesity और व्यायाम की कमी से पैरों में Blood Circulation रुक जाता है, जिससे यह स्थिति पैदा होती है।

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Varicose Veins

शरीर का अतिरिक्त वजन ढोने के दबाव और तनाव से घुटनों के जॉइंट पर असर पड़ता है और उनका घिसना या उनमें खराबी आना शुुरू हो जाता है।

varicose veins : जयपुर . वैरिकाज नसों ( Varicose Veins ) में एक कॉमन कंडीशन ( Common Condition ) है जो लगभग 5 प्रतिशत भारतीयों ( Indians ) को प्रभावित करती है। खासकर शहरी जीवनशैली ( Urban lifestyle ) जी रहे भारतीयों के बीच इस स्थिति पर तत्काल ध्यान देने की जरूरत है। क्योंकि अक्सर काम के दौरान उन्हें लंबे समय तक बैठे रहना होता है, मोटापे ( obesity ) और व्यायाम की कमी से पैरों में ब्लड सर्कुलेशन ( blood circulation ) रुक जाता है, जिससे यह स्थिति पैदा होती है।


वैरिकाज नसों को सबसे अधिक पैरों में देखा जाता है, खासकर घुटनों के पीछे के एरिया में। यह त्वचा की सतह के नीचे मुड़ी व बढ़ी हुई नसों के रूप में दिखाई देते हैं सामान्य लक्षणों में भारीपन, हल्का दर्द, त्वचा के रंग में बदलाव चुभन वाला दर्द बैचेनी और ऐंठन या तेज दर्द भी शामिल हैं।

नारायणा अस्पताल के इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट डॉ. राजेंद्र बंसल ने बताया कि वैरिकाज नसों की सिर्फ कॉस्मेटिक समस्या नहीं है और इसके काफी गहरे प्रभाव हो सकते हैं। यदि वैरिकाज वेंस को बिना इलाज ही छोड़ दिया जाए तो गंभीर ओडेमा, त्वचा संबंधी रोग, टिश्यू डिसऑर्डर और अल्सर हो सकते हैं। गंभीर केसों में व्यक्ति क्रोनिक वेनस इनसफिशियेंसी और वेनस रिफ्लक्स डिसीज से जूझ सकता है, जिसमें क्षतिग्रस्त नसों में वाल्वों का अक्षम कार्य, ब्लड फ्लो और पूलिंग का कारण बनता है। प्रारंभिक अवस्था में इस कंडीशन का आसानी से इलाज किया जा सकता है, लेकिन एडवांस स्टेज में, इसमें चिकित्सीय उपचार जैसे इंवेसिव ट्रीटमेंट की आवश्यकता हो सकती है।


वैरिकाज नसों को आसानी से रोका जा सकता है और जीवन शैली में कुछ सिंपल बदलाव करके इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है। स्वस्थ्य वजन बनाए रखें और नियमित व्यायाम करें। यदि आपके काम में लंबे समय तक बैठे या खड़े रहना शामिल है, तो सुनिश्चित करें कि आप छोटे अंतराल के दौरान नियमित रूप से चलते-फिरते रहें।


डॉ. राजेंद्र बंसल ने बताया कि जिन रोगियों में यह बीमारी जल्दी पकड़ में आ जाती है, उन्हें अपने पैरों को ऊंचाई पर रखने या ब्लड सर्कुलेशन को बहाल करने और सुधारने के लिए कंप्रेशन स्टॉकिंग्स पहनने की सलाह दी जा सकती है, जटिल मामलों में सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। कुछ विकल्पों में वेनस लिगेशन और स्ट्रिपिंग, फ्लेबेक्टोमी और एंडो वेनस लेजर थेरेपी शामिल हैं। रेडियो फीक्वेंसी एब्लेशन थेरेपी (आरएफए) और मेडिकल एडहेसिव थेरेपीज इस समस्या से निपटने के लिए नए ट्रीटमेंट के ऑप्शन के तौर पर सामने आ रही हैं। तकनीक में रेडियो फ्रीक्वेंसी ऊर्जा का उपयोग एक नस के अंदर की वॉल को गर्म करने और नुकसान पहुंचाने के लिए किया जाता है, यह पैर में सिकुडऩ के लिए वैरिकाज वेंस बनाता है।

एडहेसिव ट्रीटमेंट में, एक कैथेटर को पैर में एक छोटी एक्सेस साइट और वेन (शिरा) के रोगग्रस्त क्षेत्र में निर्देशित किया जाता है। एक बार जब यह प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाती है तो मेडिकल एडहेसिव सेगमेंटल तरीके में विभिन्न बिंदुओं पर प्रशासित किया जाता है और नस को मैन्युअल कंप्रेशन के साथ बंद कर दिया जाता है, दोनों ओपीडी प्रक्रियाएं हैं और बहुत दर्द या चोट नहीं पहुंचाती हैं और इससे जल्दी ठीक होने की भी संभावना रहती है।