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द्रव्यवती नदी पर सियासत…पांच साल में नहीं हो पाया पूरा काम

सपना नहीं बना हकीकत, आज भी लोग नहीं कर पा रहे नदी किनारे सैर  

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द्रव्यवती नदी पर सियासत...पांच साल में नहीं हो पाया पूरा काम

देहलावास एसटीपी का काम पूरा न होने से सीवरेज का गंदा पानी सीधे द्रव्‍यवती नदी में गिरता है। ये एसटीपी ग्रेटर निगम की ओर से बनवाई जा रही है। लेकिन, काम धीमी गति से चल रहा है।

राजधानी की द्रव्यवती नदी सियासी भंवर में ऐसी फंसी की पांच वर्ष से अधिक समय बीतने के बाद भी काम पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में नदी किनारे सैर करने का सपना दिखा जिस प्रोजेक्ट पर 1400 करोड़ रुपए खर्च किए, वो हकीकत आज तक नहीं बन पाया।

द्रव्यवती नदी का ज्यादातर हिस्सा विद्याधर नगर, सिविल लाइन्स, सांगानेर और बगरू विधानसभा क्षेत्र में आता है। नदी का आंशिक हिस्सा झोटवाड़ा और बस्सी विधानसभा क्षेत्र में आता है। नदी किनारे यहां लाखों की आबादी रहती है। अभी भाजपा के पास दो और इतनी ही सीटें कांग्रेस के पास हैं। लेकिन, पिछले पांच वर्ष में कांग्रेस राज में काम पूरा नहीं हो पाया। जबकि, पूर्ववर्ती भाजपा सरकार का यह ड्रीम प्रोजेक्ट था। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने इस प्रोजेक्ट से जयुपर की सूरत बदलने का दावा किया था।

ये दिक्कत नहीं हुई दूर
-आस-पास की कॉलोनियों को जलभराव से निजात जरूर मिल गई। लेकिन, नदी के किनारे रहने वाले लोग दुर्गंध से परेशान हैं।
-पानी का बहाव भी नहीं हो रहा। इतना ही नहीं, नियमित रूप से नदी की सफाई भी नहीं हो रही है।

पिछले विस चुनाव खूब हुआ था शोर
-पिछले चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों ने द्रव्यवती नदी के विकास का चुनाव प्रचार में खूब बखान किया।
-जिस लैंडस्कैप पार्क पर नदी के 17 किमी हिस्से का उद्घाटन हुआ था, वो सांगनेर विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है।
-कांग्रेस प्रत्याशियों ने पैसे के दुरुपयोग की बात कही थी।

किस विस में कितनी बहती है नदी
विद्याधर नगर: 10 से 12 किमी
सिविल लाइन्स: 12 से 14 किमी
सांगानेर: 08 से 10 किमी
बगरू: 10 से 12

खास-खास
-अप्रैल, 2016 को नदी को संवारने का शुरू हुआ था काम
-17 किमी के हिस्से का उद्घाटन हुआ था वर्ष 2018 में (47 किमी में से)
-1676 करोड़ रुपए की है ये पूरी परियोजना

काम नहीं आए काम
-चैनल के दोनोंओर 34 किमी में पांच मीटर चौड़े वॉक वे बनाए
-170 एमएलडी के सीवरेज प्लांट लगाए गए
-शहरी क्षेत्र में वॉक वे पब्लिक अलाउंसमेंट सिस्टम लगाए गए
-30 किमी के हिस्से में निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाए गए।