
राजस्थान में विलेज मास्टर प्लान, 30 दिसम्बर तक तय होगा 30 साल का 'भविष्यÓ
जयपुर. प्रदेश में पंचायतें 30 दिसंबर तक तय करेंगी कि अगले 30 वर्ष में गांवों के सुनियोजित विकास के लिए कितनी जमीन चाहिए होगी। इसी दौरान सभी ग्राम पंचायतों में शामिल गांवों के लिए मास्टर प्लान तैयार कर इसके लिए आवश्यक भूमि का चिह्नीकरण भी किया जाएगा।
गांवों का मास्टर प्लान बनाने की घोषणा पर आगे बढ़ते हुए सरकार ने सभी कलक्टरों और जिला परिषदों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों को इस बारे में निर्देश दिए हैं। विलेज मास्टर प्लान के लिए सभी पंचायतों में प्रशिक्षण शुरु हुए हैं। ये दस्तावेज तैयार कर 20 दिसंबर तक ग्राम सभाएं इनका अनुमोदन करेंगी। मास्टर प्लान के अनुसार विकास कार्यों के लिए अगले तीस वर्ष में कितनी जमीन आवश्यक होगी, इसकी जानकारी 30 दिसंबर तक सरकार को भेजनी है। इसके बाद पंचायत राज विभाग समग्र रूप से पूरे प्रदेश में जमीन की आवश्यकता देखते हुए भूमि सेटअपार्ट कराने की प्रक्रिया शुरू करेगा। राज्य सरकार ने इस बजट में गांवों का मास्टर प्लान तैयार कराने की घोषणा की थी। ये मास्टर प्लान वर्ष 2050 तक गांवों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किए जाएंगे। सबसे पहले 2009-10 की अशोक गहलोत सरकार के पहले बजट में मास्टर प्लान की तर्ज पर गांवों के विकास की बात कही गई थी। सरकार ने 3.30 करोड़ रुपए खर्च कर 10 हजार से अधिक आबादी वाले 81 गांवों के मास्टर प्लान दस्तावेज भी तैयार कराए थे।
राज्य में 12943 गांव अभावग्रस्त घोषित
प्रदेश में इस बार कई जिलों में भारी बारिश से हुए फसल खराबे को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने गंभीरता से लिया है। किसानों के नुकसान को देखते हुए राज्य सरकार ने बुधवार को अधिसूचना जारी कर 18 जिलों के 12943 गांवो को अभावग्रस्त घोषित किया है। इन गावों में संबंधित प्रावधान 31 दिसम्बर तक लागू रहेंगे। अधिसूचना के अनुसार अजमेर जिले के 154, बांसवाड़ा के 1532, भीलवाड़ा के 748, बारां के 1085, बूंदी के 689, चितौडगड़़ के 1306, धौलपुर के 57, डूंगरपुर के 1011, झालावाड़ के 1622, जोधपुर के 7, कोटा के 887, करौली के 20, नागौर के 49, पाली के 170, प्रतापगढ़ के 1013, सवाईमाधोपुर के 17, टोंक के 580, उदयपुर जिले के 1996 गांवों को अभावग्रस्त घोषित किया गया है।
Published on:
07 Nov 2019 12:34 am
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