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जयपुर मेट्रो के छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन का क्या है ‘आइलैण्ड पैटर्न’, जानिए

— मानसरोवर और चांदपोल अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन से अलग है रेल ट्रेक की डिजाइन  

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जयपुर

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Pawan kumar

Feb 22, 2019

jaipur metro

jaipur metro

जयपुर। जयपुर मेट्रो के छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ पर बनने वाले भूमिगत मेट्रो स्टेशन आइलैण्ड पैटर्न पर बन रहे हैं। जबकि जयपुर मेट्रो का चांदपोल स्टेशन का प्लेटफार्म अलग डिजाइन के पैटर्न पर बना है। नए बने छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन विदेशों की तर्ज पर आइलैण्ड पैटर्न पर बनाए गए हैं।

क्या है आइलैण्ड पैटर्न
जयपुर मेट्रो इंजीनियर्स ने बताया कि आईलैंड की तरह प्लेटफार्म होता है, जिसमें यात्री बीच में बने प्लेटफॉर्म पर रहते हैं। प्लेटफॉर्म के दोनों तरफ रेलवे ट्रेक बने होते हैं, एक ट्रेक पर ट्रेन आती है, तो दूसरे ट्रेक से जाती है। छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ भूमिगत मेट्रो स्टेशन पर आने और जाने वाले दोनों ही यात्री एक ही प्लेटफॉर्म का उपयोग करेंगे। जयपुर मेट्रो ने दोनों ही मेट्रो स्टेशनों को आइलैण्ड पैटर्न के हिसाब से बनाया है।

अलग है चांदपोल, मानसरोवर स्टेशन
जानकारी के अनुसार चांदपोल मेट्रो स्टेशन में आने—जाने के लिए अलग—अलग प्लेटफार्म बने हुए हैं, मानसरोवर से आने वाले यात्री अलग प्लेटफॉर्म पर उतरते हैं। वहीं, चांदपोल से मानसरोवर जाने वाले यात्रियों को अलग प्लेटफार्म से जाना होता है। यानी कि मेट्रो यात्रियों के आने—जाने के लिए अलग—अलग प्लेटफार्म बने हुए हैं।

इसलिए बनेंगे आइलैण्ड पैटर्न पर
जानकारी के अनुसार छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ पर चांदपोल की बजाय चौड़ाई कम है। इसलिए छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ पर आइलैण्ड पैटर्न से स्टेशन बनेंगे। छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशन की लम्बाई 250 मीटर और चौड़ाई 24 मीटर है। जयपुर मेट्रो जमीन में 18 मीटर गहराई में चलेगी। 24 मीटर चौड़ाई के कारण दोनों मेट्रो स्टेशन आइलैण्ड पैटर्न पर बनेंगे। इससे लागत भी कम आएगी और मेट्रो का संचालन भी बेहतर ढंग से हो पाएगा। सिंगापुर सहित विदेशों में आइलैण्ड पैटर्न पर मेट्रो प्लेटफॉर्म बने हुए हैं।

नए सिरे से बनेगी बड़ी चौपड़
जब छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ मेट्रो स्टेशनों का काम पूरा हो जाएगा, तब स्टेशन की उपरी सतह पर छोटी चौपड़ और बड़ी चौपड़ का पुनर्निर्माण किया जाना है। इनमें से छोटी चौपड़ का तो निर्माण हो चुका है। जबकि बड़ी चौपड़ का निर्माण होना बाकी है। मेट्रो प्रशासन का कहना है कि अंडरग्राउंड मेट्रो स्टेशन बनाने के लिए प्राचीन छोटी और बड़ी चौपड़ को हटाना पड़ा था। मेट्रो स्टेशनों का काम पूरा होने के बाद बड़ी चौपड़ को नए सिरे से बनाया जाएगा। इसका जिम्मा कंसल्टेंट फर्म आभा नारायण लाम्बा को सौंपा गया है।