
Rajasthan Politics : पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट के खिलाफ एक बार फिर से कार्रवाई की सुगबुगाहट आ रही है। राज्य के सियासी गलियारों से लेकर दिल्ली तक मची धमाचौकड़ी के बीच कांग्रेस पार्टी राजनीतिक चौखट को पुख्ता करने में लगी हुई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत दिल्ली का चक्कर पर चक्कर लगा रहे हैं तो प्रभारी सुखजिंदर रंधावा सचिन पायलट के खिलाफ शिकायत पर शिकायत दिल्ली आलाकमान को पहुंचा रहे हैं।
राजस्थान विधानसभा चुनाव का राजनीतिक बिगुल बज चुका है। कांग्रेस और भाजपा सहित सभी पार्टियां चुनावी मोड में आ चुकी हैं। ऐसे में कांग्रेस नेता और गुर्जर समाज के बड़े राजनीतिक चेहरे सचिन पायलट पर कार्रवाई थोड़ी मुश्किल सी दिखती है। पंजाब से आए प्रभारी पंजाब वाली गलती यहां नहीं दोहराना चाहेंगे। फिर भी अगर कांग्रेस ऐसा करती है तो निश्चित रूप यह बड़ा और बेहद गंभीर फैसला साबित हो सकता है।
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सचिन पायलट पर सात बैठक, नतीजा सिफर
पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट को लेकर दिल्ली में सात बैठक हो चुकी हैं लेकिन अब तक नतीजा नहीं निकला है। वह भी तब जब प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सचिन पायलट के खिलाफ हर तरह से कार्रवाई करने का प्रयास कर रहे हैं। बस उन्हें दिल्ली आलाकमान से हरी झंडी मिलने का इंतजार है। शायद ही उन्हें यह हरी झंडी मिले। आइए आपको बताते सचिन पायलट को लेकर हुई सात सियासी बैठकों का हाल...
12 अप्रेल:
सचिन पायलट दिल्ली पहुचे और इसी दिन सुखजिंदर रंधावा भी अनशन पर बात करने के लिए राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, के.सी. वेणुगोपाल से मुलाकात की। रंधावा ने सचिन पायलट के खिलाफ कार्रवाई की बात कही। नतीजा—कुछ नहीं
13 अप्रेल:
दूसरी बैठक के लिए प्रभारी रंधावा सुबह फिर राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के पहुंचे के.सी. वेणुगोपाल साथ रहे। तीनों के बीच फिर चर्चा हुई। नतीजा-बैठक समाप्त
13 अप्रेल:
तीसरी बैठक में रंधावा ने खड़गे और वेणुगोपाल से कहा कि पायलट को मानेसर वाले विधायकों का समर्थन भी मिल रहा है। अनशन में पायलट को समर्थन देने कई सरपंच, पंचायत समिति के सदस्य, पार्षद भी पहुंचे थे। खड़गे और वेणुगोपाल ने रंधावा की पूरी बात सुनी और उन्हें राहुल गांधी से मिलने को कहा।
13 अप्रेल:
चौथी बैठक रंधावा ने राहुल गांधी से की। यहां रंधावा ने कहा कि पायलट को अनशन से पहले उनसे बात करनी चाहिए थी। यदि असंतुष्ट थे तो वे सरकार से बात कर हल करने का प्रयास भी करते, लेकिन पायलट ने ऐसा मौका ही नहीं दिया। राहुल गांधी ने कमलनाथ को पायलट से बात करने के लिए आगे किया।
13 अप्रेल:
पांचवी बैठक में कमलनाथ ने पहले संगठन महामंत्री वेणुगोपाल से आलाकमान की भावना को समझा। आलाकमान चुनाव से पहले कोई विवाद नहीं चाहता।
13 अप्रेल:
छंठवीं बैठक में कमलनाथ ने रंधावा से मुलाकाकत की। यहां भी रंधावा ने सचिन पायलट के खिलाफ कार्रवाई की बात दोहराई।
13 अप्रेल:
सातवीं बैठक सचिन के साथ कमलनाथ ने की। उनका पक्ष सुना और उनकी शिकायतें भी सुनी। सब मामलों पर खुलकर दो घंटे बात हुई।
आठवीं बैठक: तारीख...
अब कमलनाथ मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ करेंगे। इसके बाद ही यह मामला सुलेझेगा या फिर उलझेगा। कार्रवाई होगी या नहीं। यह तय हो जाएगा।
सचिन के खिलाफ कांग्रेस ने की कार्रवाई तो उल्टा पड़ेगा दांव:
पहली बात सचिन पायलट कांग्रेस के राष्ट्रीय नेताओं में भी गिने जाते हैं। गुर्जर समाज से ताल्लुक रखने वाले पायलट ने समाज की राजनीति नहीं की। उनके समर्थक विधायकों में गुर्जर, मीणा, जाट या राजपूत सभी वर्ग से हैं। ऐसे में कांग्रेस जिस जातीय समीकरण के सहारे चुनाव जीतना चाहती है। सब फेल हो जाएगा।
दूसरा कारण:
सचिन पायलट के अनशन को लेकर उनके खिलाफ कोई एक्शन लिया जाता है तो फिर इसी से संबंधित मामले में अशोक गहलोत के खास सिपहसालार शांति धारीवाल, महेश जोशी, आरटीडीसी चेयरमैन धमेंद्र राठौड़ के खिलाफ भी कार्रवाई करनी होगी। यह कार्रवाई मुख्यमंत्री अशोक गहलोत कतई नहीं चाहेंगे।
Published on:
25 Apr 2023 12:45 pm
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