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वो साइट पर सीमेंट के बोरे उठा रहा था, दोस्त दौड़कर आए… बोले तू सरकारी टीचर बन गया यार, खुशी से रोने लगा मजदूर

International Labour Day: उसके दोस्तों ने उसके रोल नंबर ले रखे थे, रोल नंबर से तलाश की और उसके बाद बधाई देने साइट पर पहुंचे, वहां पर रेखाराम सीमेंट के बोरे उठा रहा था। पास होने की सूचना पर खुशी के आंसू नहीं रोक सका।

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International Labour Day: आज मजदूर दिवस है। देश भर में इसे लेकर कई आयोजन हो रहे हैं। लेकिन इस बीच बात उन मेहनतकश मजदूरों की जिन्होनें अपनी लगन से असंभव से दिखने वाले कामों को संभव बना लिया। इसी कड़ी में एक श्रमिक है बाड़मेर जिले के बायतु में रहने वाले रेखाराम मेघवाल….। रेखाराम की सफलता की कहानी को धौलपुर जिले की पुलिस ने सोशल मीडिया पर भी साझा किया था।

दोस्तों से रुपए उधार लिए तब जाकर सेंटर तक पहुंचा, दिन में मजदूरी की रात में नोट्स बनाता

दरअसल रेखाराम बायतु का रहने वाला है। पिछले कई सालों से बाडमेर और आसपास के इलाकों में मजदूरी कर रहा था। दिन में ईंट और सीमेंट ढोता और रात में नोट्स बनाता। सरकारी शिक्षक बनने का जूनून इस कदर हावी था कि कई रातों तक सोता नहीं था। इसी मेहनत का फल मिला और पिछले साल जून में आए रिट परिणाम में वह सरकारी शिक्षक बन गया।

रेखाराम की इस जर्नी में उसके दोस्तों ने साथ दिया। जब रिजल्ट आया तो उसे तो यह भी पता नहीं था कि परिणाम आ गया। उसके पास फोन भी नहीं था। उसके दोस्तों ने उसके रोल नंबर ले रखे थे, रोल नंबर से तलाश की और उसके बाद बधाई देने साइट पर पहुंचे, वहां पर रेखाराम सीमेंट के बोरे उठा रहा था। पास होने की सूचना पर खुशी के आंसू नहीं रोक सका। फिलहाल वह बच्चों का भविष्य बनाने में लगा हुआ है।