सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर में 10-50 साल की उम्र की महिलाओं के प्रवेश पर लगी रोक को हटा दिया. सभी उम्र वर्ग की महिलाएं अब मंदिर में प्रवेश कर सकेंगी. महिलाओं के प्रवेश को लेकर दायर की गई कई याचिकाओं पर फैसला सुनाते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने महिलाओं के लिए मंदिर के दरवाजे खोल दिए हैं. आपको बता दें कि आठ दिनों तक चली सुनवाई के बाद 3 अगस्त को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया गया था. इस मामले में जस्टिस मिश्रा, जस्टिस आर एफ नरीमन, जस्टिस ए एम खानविलकर, जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ और जस्टिस इंदू मल्होत्रा की पीठ ने पहले कहा था कि महिलाओं को प्रवेश से अलग रखने पर रोक लगाने वाले संवैधानिक प्रावधान का ‘उज्ज्वल लोकतंत्र’ में ‘कुछ मूल्य’ हैं. फैसला सुनाते हुए अदालत ने कहा था कि सबरीमाला के नियम संविधान, के अनुच्छेद 14 और 25 का उल्लंघन करते हैं. महिलाएं पुरुषों से किसी भी मामले में कम नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि धर्म, जिन्दगी जीने का तरीका है.