
मिर्गी से जूझ रहीं महिलाएं भी बिना बन सकती मां
जयपुर। मिर्गी से जूझ रही महिलाएं न सिर्फ सामान्य जीवन जी सकती हैं, बल्कि मातृत्व का सुख भी प्राप्त कर सकती हैं। ऐसा तब होगा जब महिला मिर्गी की सही दवाइयां ले और समय-समय पर न्यूरोलॉजिस्ट और ऑब्स्टेट्रिशियन से खुद की जांच कराती रहे और डॉक्टर की सलाह पर अमल करती रहे। इंडियन एपिलेप्सी सोसायटी और इंडियन एपिलेप्सी एसोसिएशन की ओर से आयोजित इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ईकॉन-2023 में विशेषज्ञों ने शनिवार को यह जानकारी दी।
बेंगलुरु के डॉ. जीटी सुभाष ने बताया कि मिर्गी की समस्या महिला की फर्टिलिटी को प्रभावित नहीं करती है। अगर किसी महिला को मिर्गी की समस्या है तो इसके बावजूद भी वो मां बनने की पूरी क्षमता रखती है क्योंकि मिर्गी की दवाईयां फर्टिलिटी को बिल्कुल भी प्रभावित नहीं करती। लेकिन गर्भधारण करने से पहले प्लानिंग करना बहुत जरूरी है। गर्भधारण के बाद गर्भस्थ शिशु को दवाओं से नुकसान हो सकता है। इसीलिए न्यूरोलॉजिस्ट मरीज के गर्भाधारण से पहले ही कुछ दवाओं में बदलाव करते हैं। इसीलिए प्लानिंग करके ही प्रेग्नेंसी के बारे में सोचें। आयोजन चेयरपर्सन डॉ. आरके सुरेका ने बताया कि कॉन्फ्रेंस में दूसरे दिन दिवंगत न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अशोक पानगढ़िया मेमोरियल क्विज आयोजित की गई, जिसमें विजेता स्टूडेंट्स को पुरस्कृत किया गया। एसएमएस मेडिकल कॉलेज की न्यूरोफिजिशियन डॉ. भावना शर्मा ने बताया कि डॉ. बी वेंगम्मा ने शोभा अर्जुनदास ओरेशन और डॉ. मनमोहन मेंहदीरत्ता ने प्रेसिडेंशियल ओरेशन आईईएस दिया। आयोजन सचिव डॉ. अंजनी कुमार शर्मा और ट्रेजरार डॉ. सुरेश गुप्ता ने बताया कि डॉ.एसके भोई ने स्ट्रोक और हेड इंजरी के बाद दौरे, डॉ. आरुषि ने मेटाबॉलिज्म बेस्ड ड्रग थेरेपी और डॉ. बिस्वमोहन मिश्रा ने टारगेट ग्लूटामेट पर अपना प्रेजेंटेशन दिया।
मां-पिता दोनों को मिर्गी तो 10 प्रतिशत बच्चों को खतरा
गर्भावस्था के 10 से 12 हफ्ते के बीच लेवल-2 सोनोग्राफी टेस्ट करवाना चाहिए जिससे गर्भस्थ शिशु में संभावित विकार के बारे में पता लगाया जा सके। अगर मां और पिता दोनों मिर्गी के मरीज हैं तो बच्चे को मिर्गी होने का खतरा 10 प्रतिशत तक होता है। इसे भी अच्छे मेडिकल केयर से बचाव किया जा सकता है।
Published on:
23 Jul 2023 12:52 am
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