
स्वयं से बातचीत मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं में सुधार करती है।
दिमाग पर असर: सकारात्मक सोच के लिए जरूरी है कि आप अपने शब्दों का चयन ठीक प्रकार से करें। ऐसा इसलिए क्योंकि जो भी शब्द आप बोलते हैं या मन में दोहराते हैं, उसका दिमाग पर गहरा प्रभाव होता है।
मनोवैज्ञानिक अवस्था: कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि स्वयं से बातचीत मनोवैज्ञानिक अवस्थाओं में सुधार करती है। इससे लोगों को अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। बातचीत में आपके द्वारा चुने गए शब्द प्रभावित करते हैं कि किस प्रकार से दूसरे, आपकी बातों पर प्रतिक्रिया देते हैं, जो कि सकारात्मक या नकारात्मक हो सकती है।
शब्दों पर ध्यान दें: इससे पहले कि आप अलग-अलग शब्दों को चुनें। आपको यह पहचानना होगा कि आप पहले से कौन से शब्दों का उपयोग कर रहे हैं। इस बात पर भी ध्यान दें कि आप बातचीत में चीजों का किस प्रकार से वर्णन करते हैं, विशेष रूप से अपनी भावनाओं का।
नकारात्मक शब्द: कई लोग सकारात्मकता के लिए अपने जीवन में शामिल नकारात्मक शब्दों को कहीं लिखकर रखते हैं ताकि फिर इन्हें दोहराया न जाए। इसके लिए प्रत्येक नकारात्मक शब्द के साथ उसका सकारात्मक शब्द भी लिखें और इसे अपने दिमाग में बनाए रखें ताकि आगे कोई गलती न हो।
Published on:
01 Jan 2021 05:05 pm
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