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World Dance Day : नृत्य प्रतिभा से विश्व मंच पर इन्‍होंने देश का नाम किया रोशन

नृत्य एक ऐसी कला है, जिसमें खुद की प्रतिभा दिखाने के साथ ही सामने वाले को बांधे रखने की क्षमता है। मगर भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यक्ति का तन व मन से स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। डांस एक ऐसी आर्ट फॉर्म है जिसके जरिए राजधानी जयपुर की कई महिलाओं ने अपना नाम न केवल देश बल्कि विदेशों में भी रोशन किया है और राजस्थान व भारत की संस्कृति के संरक्षण में अपना अहम योगदान दिया है। विश्व डांस दिवस के अवसर पर हमने की ऐसी की चंद महिलाओं से बात -

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जयपुर

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Rakhi Hajela

Apr 29, 2023

Written BY Deepanshu

नृत्य एक ऐसी कला है, जिसमें खुद की प्रतिभा दिखाने के साथ ही सामने वाले को बांधे रखने की क्षमता है। मगर भागदौड़ भरी जिंदगी में व्यक्ति का तन व मन से स्वस्थ रहना बहुत जरूरी है। डांस एक ऐसी आर्ट फॉर्म है जिसके जरिए राजधानी जयपुर की कई महिलाओं ने अपना नाम न केवल देश बल्कि विदेशों में भी रोशन किया है और राजस्थान व भारत की संस्कृति के संरक्षण में अपना अहम योगदान दिया है। विश्व डांस दिवस के अवसर पर हमने की ऐसी की चंद महिलाओं से बात –

जापान एयरपोर्ट पर निकलवा दिए घुंघुरू

जापान के ताकासाकी आर्ट सेंटर पर हुए कॉन्सर्ट में पार्टिसिपेट करने गई स्वाति के सामान से जापान में एयरपोर्ट पर चेकिंग के समय घुंघरू निकलवा दिए गए क्योंकि उन लोगों के लिए घुंघरू जैसी वस्तु अज्ञात थी। उन्होंने उसे एयरपोर्ट पर ही छोड़ने को कहा। बाद में उन्हे समझाया गया की घुंघरू कथक का एक अहम हिस्सा है। जब उन्हे पता चला कि वो वजन में भारी 100 घुंघरूओं वाली इस पायजेब नुमा चीज को पहन कर नृत्य करने वाली हैं तब सभी क्रू मेंमबर्स ने तालियां बजाकर सभी परफॉर्मेंस का अभिनंदन किया। आज वहीं स्वाति ना केवल बच्चों को कथक सिखा रही है बल्कि 2002 में स्वाति को राजस्थान संगीत नाटक एकेडमी का युवा पुरस्कार जीत चुकी हैं और उन्हें नेशनल व स्टेट स्कॉलरशिप भी मिल चुकी है।
स्वाति के मुताबिक वह 19 साल से कथक सिखा रही हैं। वर्तमान में उनके पास करीब 150 बच्चे कथक सीख रहे है। उनका कहना है कि लोग मानते हैं कि आजकल बच्चे कथक नहीं सीखना चाहते, लेकिन पर वह इस बात से सहमत नहीं हैं। वह कहती हैं कि अगर सही राह दिखाई जाए तो बच्चे न सिर्फ कथक सीखेंगे, बल्कि उसे कॅरियर के रूप में भी अपनाएंगे। उन्होंने बताया कि उनके पास बच्चे शुरुआत में नृत्य सीखने के उद्देश्य को लेकर आए थे, पर अब उन्होंने कथक को अपने कॅरियर के रूप में अपना लिया है। स्वाति से कथक की शिक्षा लेते हुए कुछ बच्चों को 10 वर्ष से अधिक का समय भी हो गया है।
कथक को ही कॅरियर के रूप में चुना….स्वाति ने बताया कि वह राजस्थान विश्वविद्यालय से कथक में पीएचडी कर चुकी हैं और उन्हें मिनिस्ट्री आॅफ कल्चर से फेलोशिप भी प्रप्त है। पंडित गिरधारी महाराज की शिष्या स्वाति अग्रवाल स्टेट अवोर्ड के लिए भी नॉमिनी हैं।स्वाति के मुताबिक बिना परिवार के साथ के इतनी बड़ी उपलब्धि हासिल करने का सफर मुश्किल होता।

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ब्रिटिश बच्चों से करवाई गणेश वंदना

कथक में एमए रागिनी ईश्वर की एक्सपर्टीज भारतीय बैले (नृत्य नाटिका) में है, जो उदय शंकर बैले के नाम से भी मशहूर है। रागिनी के मुताबिक वह ना केवल पिंक सिटी बल्कि राजस्थान की भी अकेली भारतीय बैले डांसर हैं। रागिनी कोरियोग्राफर भी हैं। वह वर्तमान में करीब 1500 बच्चों को नृत्य का शिक्षण दे रही हैं।
रागिनी के मुताबिक उन्होंने बैले में सीता हरण, माखन चोरी और गीता सार जैसे में परफॉर्मेंस दी है। उन्हे गोविंद देव जी के मंदिर में भी परफॉर्म करने का मोका मिला है। वह बताती हैं कि गोविंद देव जी के मंदिर में परफॉर्म करना जयपुर शहर वासियों का सपना होता है। उन्होंने वहां कृष्ण, राधा , यशोधा व राधा चारों किरदारों के रूप में अपनी भूमिका निभाई।

ब्रिटिश काउंसिल के कल्चरल एक्सचेंज कार्यक्रम में ब्रिटिश स्कूलों में जाकर ब्रिटिश बच्चों को भारत की हिस्ट्री, ज्योग्राफी सहित डांस, कल्चर और ट्रेडिशन आॅफ इंडिया की जानकारी दे चुकी रागिनी के मार्गदर्शन में ब्रिटेन में ब्रिटिश बच्चे डांडिया,गरबा, और गणेश वंदना की प्रस्तुति दे चुके हैं। न्यूजीलैंड में अपनी परफॉर्मेंस दे चुकी रागिनी अपने पति धर्मवीर भाटिया के साथ मिलकर भारतीय क्लासिकल सॉन्ग गाना भी पसंद करती है। रागिनी ने बताया कि वह फेसबुक, इंस्टा व यूट्यूब पर म्यूजिक थेरेपी प्रोग्राम चलाती हैं, जिसमें देश दुनिया के लोग जुडतें हैं। इस प्रोग्राम के माध्यम से वह श्रोंताओं के मनपसंद गीत उन्हे सुनाती हैं। प्रोग्राम में न सिर्फ देश के, बल्कि विदेशों मेें भी उन्होंने लोगों के
दिलों जगह बनाई हुई है।

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गिलास पर मटका रखकर करती हैं परफॉर्म
आमतौर पर कालबेलिया डांस में डांसर एक साथ जुडी मटकियां रखकर प्रस्तुति देते हैं। लेकिन निष्ठा शर्मा अलग—अलग मटकियां एक गिलास पर रखकर परफॉर्म करती है। पत्रिका से हुई बातचीत में उन्होंने बताया कि वह 22 साल से स्टेज पर परफॉर्म कर रही हैं और अब तक लगभग पूरे भारत में वह अपनी परफॉर्मेंस दे चुकी हैं। मिनिस्ट्री आॅफ कल्चर से स्कॉलरशिप भी प्राप्त निष्ठा के मुताबिक उन्होंने अपना पहला डांस परफॉर्मेंस अपनी मां के साथ दिया था। इंडियाज गॉट टैलेंट खोज 2 की सेमीफाइनलिस्ट रही निष्ठा के मुताबिक इस शो में उनके डांस को साजिद खान, किरण खेर और बाकी सभी दर्शकों ने काफी सराहा।
लॉकडाउन में विदेशियों को दिया नृत्य का आॅनलाइन शिक्षण…
निष्ठा के मुताबिक लॉकडाउन में जब सब कुछ बंद हो चुका था, उस समय उन्होंने डांस की आॅनलाइन क्लास लेना शुरू किया। कई देश के लोगों ने उनका प्रोग्राम ज्वॉइन किया। वह बताती हैं कि जिन लोगों ने उनसे डांस सिखा वह आज अपने देश में भारतीय कल्चर को आगे बढा रहे हैं साथ ही अपनी प्रस्तुति दे रहे है। निष्ठा कहती हैं कि किसी और देश के लोगों को हमारे राजस्थान का कल्चर सिखाना मेरे लिए गर्व की बात है।

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छोटे शहर से निकलकर बनाई पहचान

क्लासिकल और फोक डांसर शालिनी भार्गव का ग्रुप नुपुर फोक डांस ग्रुप के नाम से मशहूर है। एक निजी स्कूल में टीचर शालिनी ने छोटे शहर से निकलकर अपने दम पर अपनी पहचान बनाई है। वह बताती हैं कि पुराने खयालात की मानसिकता वाले लोगों से लड़कर अपनी अलग पहचान बनाना आसान नहीं था लेकिन इसमें उनके परिवार का साथ मिला जो बेहद अहम है। इस बार आईपीएल में घूमर की प्रस्तुति दे चुकी शालिनी इंटरनेशनल लेवल पर अपनी प्रस्तुति दे चुकी हैं। अपनी परफॉर्मेंस के बारे में बताते हुए शालिनी नेकहा कि वह इंडियाज गॉट टैलेंट के 2009 के संस्करण में सेमीफाइनल तक पंहुची, आईजीटी में फॉक परफॉर्मेंस दी। जावेद जाफरी के कार्यक्रम बूगी—वूगी के 2003 वे संस्करण में प्रथम आई। पूना , ओडिसा , बरेली जैसी जगह में अपने परफॉर्मेंस के जरिए राजस्थान का चेहरा बनी। गोविंद देव जी के मंदिर में आयोजित होने वाले मशहूर कार्यक्रम लठ मार होली में भी वह अपना परफॉर्मेंस देती हैं।

परिवार के सपोर्ट के बिना सपना पूरा करना मुश्किल…
शालिनी ने बताया कि उनकी मां की रुचि भी नृत्य में ही थी लेकिन वह एक ऐसे घर से आती हैं जहां नाच गाने के बारे में कोई बात भी नहीं करता। स्टेज पर डांस परफॉर्मेंस देना भी उस समय ठीक नहीं लगता था। वह एक अलग ही झिझक महसूस करती थीं। कई बार लोगों ने भला बुरा भी बोला, पर उनके सास—ससुर व उनके पति का पूरा साथ मिला। उन्होंने इला अरुण के साथ कई परफॉर्मेंस दिए हैं। जब वह जयपुर आईं तब पंडित रवींद्र नाथ का भी साथ मिला। शादी के बाद जिम्मेदारी भी बढ़ी, इस दौरान आर्थिंक तंगी का सामना करना पडा लेकिन कभी हार नहीं मानी उसी की नतीजा है कि आज अपनी एक पहचान बना पाई हैं।

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