
World Tiger Day - देश की शक्ति, शान, सतर्कता, बुद्धि तथा धीरज का प्रतीक है बाघ
देश की शक्ति, शान, सतर्कता, बुद्धि तथा धीरज के प्रतीक बाघों के संरक्षण के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए हर साल 29 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस मनाया जाता है। नए आंकड़ों के मुताबिक, देश में बाघों की संख्या 2967 पहुंच गई है। यानी 2014 के मुकाबले बाघों की संख्या में 741 बढ़ोतरी हुई है। देश में बाघों के संरक्षण के लिए किए गए प्रयासों की सफलता के बाद अब हमारा देश दुनिया के दूसरे देशों की भी बाघों के संरक्षण में मदद करेगा।
बाघ संरक्षण पर की मेहनत
आपको बता दें कि 1973 में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी ने टाइगर प्रोजेक्ट की शुरुआत की थी। इस प्रोजेक्ट का उद्देश्य भारत में उपलब्ध बाघों की संख्या के वैज्ञानिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और पारिस्थिक मूल्यों का संरक्षण सुनिश्चित करना है। इसके तहत अब तक 50 टाइगर रिजर्व बनाए जा चुके हैं। भारत में बाघों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि पिछले कुछ सालों में भारत ने अन्य देशों की तुलना में बाघ संरक्षण पर काफी मेहनत की है।
13 देशों की मदद करेगा भारत
आपको यह भी बता दें कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण अभी दुनिया भर में ऐसे 13 देशों की पहचान कर चुका है, जहां पर बाघ पाए जाते हैं लेकिन बेहतर संरक्षण के अभाव में इनकी संख्या काफी कम है। ऐसे में अब वह इन सभी देशों को बाघों के संरक्षण को लेकर बेहतर तकनीक और योजना उपलब्ध कराएगा। बांग्लादेश, भूटान औऱ नेपाल जैसे देशों के साथ इसे लेकर चर्चा शुरू हो गई है। भारत ने जिन 13 देशों में मुहिम चलाने का फैसला लिया है, उनमें बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, रूस, म्यांमार, नार्थ कोरिया, अफगानिस्तान, लाओस, कंबोडिया, वियतनाम, थाईलैंड, इंडोनेशिया और श्रीलंका जैसे देश शामिल हैं।
बाघों के संरक्षण के प्रति जागरुकता बढ़ाना जरूरी
दुनिया भर में 29 जुलाई को विश्व बाघ दिवस बनाया जाता है। इस दिन को मनाने का फैसला साल 2010 में सेंट पिट्सबर्ग बाघ समिट में लिया गया था, क्योंकि तब जंगली बाघ विलुप्त होने के कगार पर थे। इस सम्मेलन में बाघ की आबादी वाले 13 देशों ने वादा किया था कि साल 2022 तक वे बाघों की आबादी दोगुनी कर देंगे। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य जंगली बाघों के निवास के संरक्षण और विस्तार को बढ़ावा देने के साथ बाघों के संरक्षण के प्रति जागरुकता बढ़ाना है। इनकी तेजी से कम हो रही संख्या को नियंत्रित करना बहुत जरूरी है, नहीं तो ये खत्म हो जाएंगे।
वैश्विक आबादी : वल्र्ड वाइल्ड लाइफ फंड के मुताबिक दुनिया में लगभग 3 हजार 900 बाघ ही बचे हैं। 20वीं सदी की शुरुआत के बाद से वैश्विक स्तर पर 95 फीसदी से अधिक बाघ की आबादी कम हो गई है। 1915 में बाघों की संख्या एक लाख से ज्यादा थी।
आबादी कम होने की वजह
भारत में बाघों की संख्या बढ़ रही है लेकिन विश्व में इसकी संख्या में कमी आई है इसके कई कारण हैं। वन क्षेत्र घटा है। इसे बढ़ाना और संरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती है। चमड़े, हड्डियों एवं शरीर के अन्य भागों के लिए अवैध शिकार, जलवायु परिवर्तन जैसी भी चुनौतियां शामिल हैं।
बाघों की जिंदा प्रजातियां : साइबेरियन टाइगर, बंगाल टाइगर, इंडोचाइनीज टाइगर, मलायन टाइगर, सुमात्रन टाइगर
विलुप्त हो चुकीं प्रजातियां : बाली टाइगर, कैस्पियन टाइगर, जावन टाइगर
बाघ भारतीय उपमहाद्वीप का प्रतीक
आपको बता दें कि भारत का राष्ट्रीय पशु बाघ को कहा जाता है। बाघ देश की शक्ति, शान, सतर्कता, बुद्धि तथा धीरज का प्रतीक है। बाघ भारतीय उपमहाद्वीप का प्रतीक है। यह उत्तर पश्चिमी क्षेत्र को छोड़कर पूरे देश में पाया जाता है। विश्व भर में बाघों की कई तरह की प्रजातियां मिलती हैं। इनमें छह प्रजातियां मुख्य हैं, इनमें साइबेरियन बाघ, बंगाल बाघ, इंडोचाइनीज बाघ, मलायन बाघ, सुमात्रा बाघ तथा साउथ चाइना बाघ शामिल हैं।
Published on:
29 Jul 2020 02:17 pm

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