
जयपुर
आज विश्व ट्रॉमा दिवस हैं। चिकित्सा जगत में ट्रॉमा को एक शारीरिक क्षति माना जाता है। जो किसी भी तरह की दुर्घटना के कारण होती है।
प्रदेश के सबसे बड़े SMS अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी में घायल होकर पहुंचने वाले मरीजों पर सर्वे किया गया तो चौंकाने वाले आंकड़े निकल कर सामने आए।
गंभीर अवस्था में पहुंचने वाले मरीजों के पहुंचने का कारण जाना। तो पता लगा कि सिर्फ 75% लोग रोड एक्सीडेेंट में घायल होने के बाद यहां इलाज लेने पहुंच रहे हैं।
वहीं 25% अन्य तरह की दुघर्टनाओं से पहुंचे। जिन्हें सिर में गंभीर चोट लगने के कारण अस्पताल में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। ट्रॉमा की इमरजेंसी में 50% तो ऐसे गंभीर घायल पहुंचे जिन्होंने हेलमेट नहीं लगा रखा था। अगर वे वाहन चालक हेलमेट पहनते तो करीब 15%लोग मौत के मुंह में जाने से बच सकते थे। वहीं 24%को न्यूरोसर्जरी की आवश्यकत्ता नहीं पड़ती।
फैक्ट फाइल:
15 दिन में ट्रॉमा की इमरजेंसी में पहुंचे कुल 330 पेशेंट
रोड एक्सीडेंट में घायल 250 लोग कुल मरीजों का (75%)
बिना हेलमेट कुल 124 (50%) लोग
15 से 35 वर्ष के कुल 138 ( 42% ) युवा
35 से 55 की वर्ष के कुल 89 (27%) लोग
सिर में गंभीर चोट कुल 69%
गंभीर चोट से न्यूरोसर्जरी की 90 लोग
हेलमेट नहीं पहनने से जान गंवाने वालों की संख्या 37 (15%)
8 घंटे में 25% लोग पहुंचते है अस्पताल
8 से 24 घंटे में पहुंचते है 48% लोग
24 घंटे बाद अस्पताल पहुंचते है 26% लोग
न्यूरोसर्जन्स की टीम ने अवेयरनेस के लिए किया सर्वे
SMS अस्पताल के neurosurgery विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ.मनीष अग्रवाल, डॉ.रोहित बाबल,डॉ.दीपक लोहिया,डॉ.अंकित शर्मा,डॉ.मनीष भास्कर और डॉ.संग्राम बल ने ट्रोमा की इमरजेंसी में पहुंचने वाले मरीजों पर 1 से 16 सितम्बर तक राउंड दी क्लॉक सर्वे किया।
जिसमें चौकाने वाले तथ्य सामने आए। आमजन खुद ही गलती कर और एक हेलमेट नहीं पहनने की लत के कारण ही अस्पताल तक पहुंचे।
15 दिन में कुल 330 पेशेंट ट्रॉमा की इमरजेंसी में पहुंचे। इसमें अकेले दो पहिया और चार पहिया वाहन से रोड एक्सीडेंट के कारण 250 लोग घायल होकर पहुंचे। जो कुल मरीजों का 75%था। इसमें से भी 50% मतलब 124 लोग अगर हेलमेट पहने होते तो उनके सिर में गंभीर चोट नहीं लगती।
एक्सीडेंट में घायल होने वाले वालों में 15 से 35 वर्ष के कुल 42% यानि की 138 युवा थे। 35 से 55 की उम्र के 27% यानि की 89 लोग थे। जो रोड एक्सीडेंट के कारण सिर में गंभीर चोट ले बैठे। कुल 250 में से 90 की न्यूरोसर्जरी की गई। जिसमें से 37 मतलब 15%ने जान गंवा दी।
न्यूरासर्जन डॉ.मनीष अग्रवाल ने बताया इस सर्वे के पीछे सिर्फ लोगों को जागरूक करना उदे्श्य हैं। जिससे आमजन यह समझ सकें कि सड़क पर चलते समय हेलमेट लगाना या सीट बेल्ट बांधना उनके लिए कितना जरूरी हैं।
15 से 55 वर्ष के 69 प्रतिशत लोग एक्सीडेंट में घायल होकर पहुंचे और जिनकी मौत हुई वह भी इसी उम्र के लोग थे। इन पर परिवार के चलाने की जिम्मेदारी तक होती है।
ऐसे में इन्होंने एक हेलमेट नहीं लगाने से सिर्फ खुद का ही जीवन खराब नहीं किया बल्कि कई जिम्मेदारियां छोड़कर जाने से अपने परिवार को आर्थिक स्थिति से भी तोड़ दिया।
खुद कमाने लायक तक नहीं बचे। कई तो इलाज के बाद भी पूरी तरह ठीक नहीं हुए। किसी का एक हिस्से में लकवा रह गया लर्निंग डिस्बेलिटी,मेमोरी डेफिशिएट,बोलने समझने की समस्या,सोशल लाइफ तक बदल गई।इसलिए एक हेलमेट ना सिर्फ जिंदगी बचा सकता है,बल्कि आपके परिवार की जीवन रेखा है।
डॉ.अंकित शर्मा ने बताया कि यह जयपुर के सिर्फ एक सेंटर का सर्वे है। प्रदेश में ऐसे सेंटर्स पर कितने मरीज पहुंचते होंगे। इस सर्वें में वहीं शामिल है जो सांस चलते हुए अस्पताल में पहुंचे।
इसके अलावा रोज ऐसे कई मरीज आते है जो अस्पताल पहुंचते पहुंचते दम तोड़ देते है या मौके पर ही सिर में गंभीर चोट लगने से अपना जीवन खो बैठते है। हमने पाया कि लोग अस्पताल पहुंचने में भी देरी करते है। 25% लोग ही 8 घंटे में हादसे में घायल होने के बाद अस्पताल पहुंच पाते है।
वहीं 8 से 24 घंटे में 48% और 24 घंटे बाद 26% लोग अस्पताल पहुंचते है,इसलिए वह गंभीर अवस्था तक पहुंचते है।
इसलिए वाहन से पास जाए या दूर हेलमेट और सीट बेल्ट का प्रयोग अवश्य करें।
NCRB के रेकॉर्ड् के अनुसार 2021 मेे राजस्थान में 20954 सड़क हादसों में 10 हजार 043 लोगों ने जान गंवाई हैं। देश में कुल 4,03,116 रोड एक्सीडेंट में 1,55,622 लोगों की मौत हुई।
Published on:
17 Oct 2022 01:34 pm
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