
राजस्थान का नाम सुनते ही हर एक के दिलो दिमाग में भले ही रेत के धोरों और मृग मरिचिका की छवियां उतर आती होंगी, लेकिन वीर प्रसूता राजस्थान की धरती अथाह प्राकृतिक सौंदर्य भी समेटे हुए हैं…आइए बुलेटिन की शुरुआत करते हैं ऐसे ही एक मनभावन दृश्य के साथ जो न सिर्फ आपको एक सुखद अनुभूति करवाएगी…बल्कि राजस्थान का प्राकृतिक सौंदर्य भी आपको मंत्रमुग्ध कर देगा..
ये दृश्य है बांसवाड़ा और डूंगरपुर जिलों की सीमा पर स्थित बेणेश्वर धाम का…सोम और माही नदियों से घिरे बेणेश्वर धाम से कुछ ही दूरी पर जाखम नदी भी माही में समाहित हो जाती है…यह दृश्य राजस्थान के संगम का है…माही, सोम और जाखम नदियों का संगम…ड्रोन कैमरे की मदद से ऋतेश पंचाल, पत्रिका के फोटो जर्नलिस्ट दिनेश तंबोली और पत्रिका संवाददाता विनोद नायक ने यह दृश्य कैद किया…
यह पहली बार है कि बेणेश्वर धाम की ये तस्वीरें हम आपको पत्रिका टीवी पर दिखा रहे हैं…यह दृश्य कैमरे में कैद करने के लिए हमारी टीम को खासी मशक्कत करनी पड़ी…लेकिन हम आखिर कामयाब रहे और आप तक ला सके बेणेश्वर और राजस्थान के त्रिवेणी संगम की जीवंत तस्वीरे…इसके पीछे हमारा मकसद उस परेशानी को भी उजागर करना था जो हर बारिश के बाद यहां आने वाले लोगों को परेशानी में डालती है…बारिश के कारण टाबू बने बेणेश्वर धाम के रास्ते नदियों में पानी आते ही बंद हो जाते हैं…बेणेश्वर धाम आने वाले श्रद्धालु, क्षेत्र के दुकानदार और मजदूर टापू पर फंस जाते हैं…हालांकि 24 से 48 घंटे में पानी उतर जाने के बाद हालात सामान्य हो जाते हैं…
ये दृश्य प्राकृतिक सौंदर्य तो दर्शा ही रहे हैं, लेकिन बार बार टापू बन जाने वाले बेणेश्वर धाम की आवाज भी इन दृश्यों में छिपी है कि काश सोम नदी पर बने साबला-बेणेश्वर पुल, धाम को डूंगरपुर से जोड़ने वाले वालाई पुल और माही पर बने बांसवाड़ा को जोड़ने वाले गनोड़ा पुल की ऊंचाई बढ़ जाए तो लोगों को टापू पर फंसना न पड़े…फिलहाल आप उठाइए बेणेश्वर के नैसर्गिक सौंदर्य का आनंद और दुआ कीजिए राजस्थान के इस त्रिवेणी संगम की आवाज सरकार तक पहुंच जाए।