
निवाईञ्च पत्रिका. शहर के हरि कृष्ण चंद्र मंदिर में गुरुवार की सुबह भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा निकाली गई। विशाल शर्मा ने बताया कि गुरुवार की सुबह नया मंदिर में मंहत विष्णुदत्त शर्मा के सान्निध्य में पं.चन्द्रप्रकाश शर्मा, पं.बालकिशन शर्मा, पं.राजू शर्मा और पं.कुणाल शर्मा ने मंत्रोच्चार के साथ भगवान हरि कृष्ण चंद्र का पंचगव्य व पंचामृत से महाभिषेक किया।
इसके बाल विशेष पोशाक पहनाकर भगवान का भव्य श्रृंगार किया गया और गाजेबाजे के साथ भगवान को गर्भगृह से बाहर लाकर जगन्नाथ रथ में विराजमान किया गया। मंदिर पुजारियों की ओर से रथ को सजाकर और भगवान की झांकी सजाई गई तथा भगवान की पांच बार अलग अलग महाआरती की गई। आरती के बाद श्रद्धालुओं ने जयकारों लगाते हुए भगवान के रथ की रस्सी खींचकर उन्हें मंदिर परिसर में विहार करवाया।
मंदिर मंहत पं.विष्णु दत्त शर्मा ने बताया कि प्राचीन काल से चली आ रही परम्परा के अनुसार भगवान आज के दिन खेतों हल चलाने जाते है। उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ साक्षात भगवान है। और रथयात्रा का अधात्मिक, सांस्कृतिक, धार्मिक और पौराणिक महत्व है। इस दौरान भगवान के भीगे हुए मूंग, मोठ, चने और विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग लगाया गया। इसके बाद भजन गायकों ने गणपति वंदना से भजनामृत कार्यक्रम का शुभारंभ किया। गायकों ने मेरे प्रभु निकले बाहर, देने जगत को दर्शन.., चारों धामों में है धाम, पुरी में विराजित जगन्नाथ धाम.., चलो रे दर्शन को,खींचों रे बाबा के रथ को.., कान्हा बैठे रथ में, संग बहना भैय्या रे.., उमड़ गया सैलाब आज, प्रभु जगन्नाथ के दर्शन को.., चल पड़ा रेला पुरी की सड़कों पर, खींच रहे रथ करोडों नारी व नर.. सहित बाबा श्याम, हनुमान, भगवान शंकर आदि देवताओं की गाथाओं पर भजनों की प्रस्तुति दी। महिलाओं ने भजनों पर भाव भिवोर होकर भक्ति नृत्य किया और आरती कर भगवान को पुन: मंदिर के गर्भगृह में मंत्रोच्चार के साथ विराजित किया। इस दौरान भंवरी शर्मा, संतोष शर्मा, अविनाश नागर, रमेश सोनी, कैलाश पारीक, अनीस सोनी सहित कई श्रद्धालु उपस्थित थे।
Updated on:
17 Jul 2026 06:00 am
Published on:
17 Jul 2026 06:00 am
