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- नहर बंदी के दौरान प्यास बुझाने उतरे पशु निकल नहीं पाए
- ग्रामीण गंदा पानी पीने के मजबूर, हो सकता है स्वास्थ्य पर असर
मोहनगढ़ (जैसलमेर). इंदिरा गांधी नहर में क्लोजर के बाद बिना सफाई किए ही पानी छोड़ दिया। ऐसे में जगह-जगह पशुओं के कई शव व कचरा तैरता दिख रहा है। सीमावर्ती क्षेत्र के ग्रामीणों को पेयजल के रूप में भी यही पानी आपूर्त किया जाता है। ऐसे में यहां बीमारियां फैलने की आशंका है। वहीं बदबूदार व गंदा पानी पीना लोगों की मजबूरी बन गई है।
गौरतलब है कि नहर बंदी के दौरान मुख्य नहर सहित विभिन्न वितरिकाएं सूख गई थी। ऐसे में प्यास के मारे कई पशु पैंदे में थोड़ा पानी देख प्यास बुझाने उतर जाते, फिर बाहर नहीं निकाल पाने से वे अंदर ही रह गए। ऐसे में अब नहर में पानी छोडऩे से पहले इसकी सफाई नहीं की। ऐसे में पानी के साथ कई पशुओं के शव व कंकाल तैरते दिख रहे हैं।
29 मार्च को हुई थी नहर बंदी
मोहनगढ़ स्थित इंदिरा गांधी नहर में बीते 29 मार्च से नहर बंदी शुरू की गई। इसमें बीते सप्ताह ही पानी छोड़ा गया। करीब डेढ माह नहर में पानी बंद रहने से सैकड़ों पशु काल का ग्रास बन गए। अब नहर पर बने पुलों के नीचे कचरा व शव जमा होने लगे हैं। इन्हें यहां निकालने वाला भी कोई नहीं है।
प्यास बुझाने के लिए गंवाई जान
जानकारों के अनुसार सूखी नहर के पैंदे में पड़े पानी से प्यास बुझाने के लिए नहर में उतरे पशुओं की अकाल मौत हो गई, जिनके शव अब भी नहर में ही पड़े है। पानी में सड़ांध मार रहे शवों पर लगे कीटाणु अब नलों से हमारे शरीर में पहुंच रहे है। जिससे बीमारी के हालात बन सकते है।
यहां जमा है कचरा
नहर के पनोधर पुलिया, मोहनगढ़ मण्डी पुलिया, जीरो आरडी हेड पर बड़ी मात्रा में कचरा व कई शव तैरते नजर आ रहे हैं। इसको लेकर नहर विभाग बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहा है। ऐसे में यहां मृत पशु सड़ांध मार रहे हैं तथा पानी भी बदबू मारने लगा है।
Published on:
18 May 2018 07:04 pm
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