
सरकार की ओर से गांवों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए महाविद्यालय शुरू किए गए। साथ ही करोड़ों रुपए की राशि से भवन बनाए गए, लेकिन अधिकारियों की लापरवाही से इन भवनों का अभी तक कोई लाभ नहीं मिल रहा है। क्षेत्र के भणियाणा गांव में एक वर्ष पूर्व तैयार किए गए राजकीय महाविद्यालय भवन को सुपुर्द नहीं किया गया है। जिसके चलते खर्च की गई करोड़ों रुपए की राशि का उपयोग नहीं हो रहा है और विद्यार्थी किराए के भवन में अध्ययन को मजबूर है। जानकारी के अनुसार राज्य सरकार की ओर से 3-4 वर्ष पूर्व भणियाणा में राजकीय महाविद्यालय स्वीकृत किया गया था। जिसके बाद भवन के लिए 5 करोड़ 51 लाख 29 हजार रुपए स्वीकृत किए गए। सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से निविदाएं आमंत्रित कर भवन निर्माण शुरू किया गया।
राज्य सरकार की ओर से स्वीकृति मिलने के बाद किराए के भवन में महाविद्यालय का संचालन शुरू कर दिया गया। तब से अभी तक महाविद्यालय किराए के भवन में ही चल रहा है। सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से करीब ढाई वर्ष पूर्व निविदाएं आमंत्रित कर कार्यकारी एजेंसी को भवन निर्माण के लिए कार्यादेश दे दिए गए।
कार्यकारी एजेंसी की ओर से गत वर्ष भवन का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया गया। कई सुविधाओं से युक्त भवन 1 वर्ष से तैयार खड़ा है और उसमें धूल जमा हो रही है। एक वर्ष बाद भी सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से भवन को महाविद्यालय प्रशासन को सुपुर्द करने को लेकर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जिसके कारण विद्यार्थियों को बिना किसी सुविधा के किराए के भवन में बैठकर अध्ययन करना पड़ रहा है। जिससे उन्हें परेशानी हो रही है।
इस संबंध में पत्रिका ने पड़ताल की तो सामने आया कि अभी तक सार्वजनिक निर्माण विभाग की ओर से भवन महाविद्यालय को सुपुर्द करने के लिए अभी तक एक भी पत्र नहीं लिखा गया है। जबकि 1 वर्ष से भवन बनकर तैयार खड़ा है। जिससे अधिकारियों की लापरवाही स्वत: प्रकट हो रही है।
भवन गत वर्ष तैयार हो गया था। अभी तक महाविद्यालय को सुपुर्दगी नहीं की गई है। सहायक अभियंता को भवन की सुपुर्दगी केे लिए निर्देशित कर दिया है। शीघ्र ही सुपुर्द कर दिया जाएगा।
Published on:
09 Jun 2025 11:15 pm

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