
World Famous Desert Festival 2024: उत्साह व उल्लास के माहौल में मरु-संस्कृति के रंग में रंगे देशी-विदेशी पर्यटक
World Famous Desert Festival 2024: नगर आराध्य देव लक्ष्मीनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना के दौरान माहौल भक्तिमय नजर आया, वहीं लोक कला व संस्कृतिक का अनूठा संगम शोभा यात्रा और समारोह स्थल पूनम स्टेडियम में देखने को मिला। गुरुवार सुबह ऐतिहासिक सोनार दुर्ग स्थित लक्ष्मीनाथ मंदिर में पूजा अर्चना कर शंखनाद किया गया। सीमा सुरक्षा बल के सजे-धजे ऊंट व इन पर सवार बीएसएफ के जांबाज, केमल माउंटेन बैंड वादकों का समूह, मंगलकलश लिए बालिकाएं, लोक कलाकारों का कारवां मुख्य मार्ग से होता हुआ शहीद पूनमसिंह स्टेडियम पहुंचा। मरु संस्कृति की झलक को दृश्यावलोकन करती हुई शोभायात्रा स्थानीय बाशिंदों के साथ-साथ देशी-विदेशी सैलानियों के लिए आकर्षण का केन्द्र रही। गड़ीसर सरोवर से जिला कलक्टर प्रतापसिंह एवं पुलिस अधीक्षक सुधीर चौधरी ने हरी झंडी दिखा कर लोक संस्कृति और परंपराओं को प्रतिदर्श भव्य शोभा यात्रा को रवाना किया। गड़ीसर सरोवर से पूनमसिंह स्टेडियम तक निकली मनोहारी शोभायात्रा ने जैसलमेर के बाशिन्दों से लेकर देशी-विदेशी पर्यटकों को मरु लोक संस्कृति से रु-ब-रु कराया। मुख्य बाजार से होती हुई निकली शोभायात्रा का नगर वासियों न घरों की छतों पर बैठ कर पुष्प वर्षा की।
शाही पोषाक में हाथों में भाला
शोभायात्रा का सर्वाधिक आकर्षण का केन्द्र सीमा सुरक्षा बल के उपसमादेष्टा मनोहर सिंह शेखावत के नेतृत्व में शाही पोषाक में अपने हाथों में भाले लिए हुए बांके जवान व सजे-धजे ऊंट आकर्षण का केन्द्र रहे। देशी-विदेशी सैलानियों ने इस दृश्य को अपने कैमरों में कैद किया। शोभायात्रा में शृंगारित ऊंटों पर सवार रौबीले मरुश्री एवं प्रतियोगिता के प्रतिभागी, ऊंटों एवं ऊंट गाड़ों पर सवार पारंपरिक वेशभूषा में सुसज्जित मिस मूमल एवं महेन्दा के प्रतियोगी और विभिन्न झांकियां आकर्षण का केन्द्र रही। लोक कलाकारों के कई जत्थों ने रास्ते भर लोक नृत्यों और लोक वाद्यों से लय.ताल की धूम मचाते हुए मरु-संस्कृति और राजस्थानी परंपराओं का दिग्दर्शन कराया।
लोक गीतों की मधुर स्वरियां, माहौल में घुली मिठास
शोभायात्रा में सबसे आगे बास्केटबॉल अकादमी के छात्र अपने हाथों में पर्यटन विभाग का लोगो सहित बैनर लिए हुए थे, वहीं मस्कवादन कलाकारों ने मस्क के माध्यम से राजस्थानी लोक गीतों की मधुर स्वरियां पेश कर सभी को मोहित किया। महिला पर्यटकों ने उत्साह के साथ नृत्य भी किया। इसके साथ ही रंगी-बिरंगी पोशाकों में सजी-धजी बालिकाएं अपने सिर पर मंगल कलश धारण किए हुए शोभायात्रा की शोभा बढ़ा रही थी, वहीं आंगीगैर ने नृत्य पेश किया। इसके साथ ही लोक कलाकरों की ओर से कच्छी घोड़ी नृत्य पेश कर पूरे माहौल को संगीत से सरोबार कर दिया। मूमल-महिन्द्रा की झांकी भी ऊंट गाड़ों पर अतिसुन्दर लग रही थी। जयपुर के फौजदार ने बहरूपिया के रूप में वेशधारण कर दर्शकों को मोहित किया। शोभायात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों से आए लोक कलाकार अपने क्षेत्र की संस्कृति एवं नाच-गान प्रस्तुत करते हुए आगे बढ़ रहे थे।
इनकी रही मौजूदगी
अतिरिक्त जिला कलक्टर परसारामए मुख्य कार्यकारी अधीकारी भागीरथ विश्नोई, आयुक्त लजपालसिंह सोढ़ा, पुलिस अधीक्षक प्रियंका कुमावत, उपनिदेशक पर्यटन कृष्णकांत, समाजसेवी कंवराजसिंह चौहान, अरूण पुरोहित, सुमार खान, कैलाश व्यास, लक्ष्मीनारायण खत्री, गाजी खां, खेल अधिकारी राकेश विश्नोई सहित जनप्रतिनिधि, नगरवासी, देशी-विदेशी सैलानी शामिल थे।
Published on:
22 Feb 2024 08:39 pm
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