धरपकड़ से बचने के लिए तरह-तरह के पैतरे-125 किमी की दूरी तक न पुलिस थाना और न पुलिस चौकी
जैसलमेर. शराब के अवैध कारोबार में जुड़े लोग पानी की बोतलों की आड़ में पुलिस व आबकारी विभाग को कई बार शराब तस्कर चकमा देने में कामयाब हो जाते हैं। शराब तस्कर वाहन में नीचे शराब की पेटियां भरते हैं और ऊपर मिनरल वाटर की बोतलों के कार्टन रख देते हैं। धरपकड़ की स्थिति में पुलिस को भ्रमित करने का यह तरीका काम में लिया जाता है। पूर्व में पकड़े गए शराब तस्करी के मामलों में यह बात सामने आई है कि तस्कर शराब से भरा टर्बो या फिर कोई अन्य वाहन गुजरात के निकट पहुंचने से पहले ही राजस्थान की सरहद के गांवों में प्रवेश करवा दिया जाता है और इसके बाद टर्बो को खाली कर इसमें रखी शराब को अलग-अलग पार्टियों को टुकड़ों में दे दिया जाता है। तस्कर शराब की पेटियों को कारों में भरकर गुजरात में प्रवेश कर जाते हैं। कई बार अवैध शराब की पेटियां या कर्टन पकड़ भी लिए जाते हैं तो उनकी कीमत बहुत ज्यादा नहीं होती है और नुकसान भी कम होता है।
यहां निगरानी नहीं आसान
नोख थाना भी अपने थाना क्षेत्र के एक तरफ जोधपुर जिले की सीमा के पास सबसे अंतिम छोर पर स्थित हैं।
नहरी क्षेत्र की बात की जाए तो बीकानेर के बज्जू थाना से जैसलमेर के नाचना पुलिस थाने तक लगभग 125 किमी की दूरी तक पुलिस थाना तो दूर पुलिस चौकी तक नहीं हैं। ऐसे में पंजाब, हरियाणा सहित राजस्थान के सूरतगढ़ व आसपास के क्षेत्र से बाड़मेर के रास्ते गुजरात तक शराब तस्करी के लिए यह क्षेत्र तस्करों के लिए सबसे आसान रास्ता बना हुआ हैं।
अनसुलझी पहेली: नोख व नाचना की दूरी
पाक सीमा से सटे सरहदी जैसलमेर जिले के नहरी क्षेत्र में नोख व नाचना थाना क्षेत्र में एक भी पुलिस चौकी नहीं हैं। नाचना थाना भी इस सडक़ मार्ग से अंदर की ओर नाचना गांव में स्थित है, जबकि शेष के क्षेत्र सडक़ मार्गों पर पुलिस की कोई निगरानी नहीं है। ऐसे में शराब तस्कर विभिन्न मार्गों से होते हुए दोनो थानों से बचकर निकलने में कामयाब हो जाते है। दोनो ही थानों के क्षेत्र की दूरी सौ किमी से अधिक हैं। नोख थाना बीकानेर जैसलमेर सडक़ मार्ग से लगभग 20 किमी अंदर की ओर है।