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Jaisalmer news- निराशाजनक…. चार साल में नहीं हो सका पूरी सरकार का ‘दीदार’- उपेक्षित रहा जैसलमेर

-वर्तमान सरकार में चार वर्ष में उपेक्षित ही रहा जैसलमेर जिला -अधिकांश मंत्रियों ने सीमांत जिले का रुख ही नहीं किया

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राज्य सरकार की बजट घोषणाएं भी नहीं हो पाई पूरी
जैसलमेर . एक तरफ जयपुर में बैठी सरकार और राज्य भर में उसके नुमाइंदे चार साल का कार्यकाल पूरा करने का जश्न मनाने में जुटे हैं, दूसरी ओर प्रदेश के अंतिम छोर पर आए मरुस्थलीय जैसलमेर जिला मौजूदा सरकार के ‘विकासरूपी एजेंडे’ से लगभग बाहर ही रहा। सरकार के प्रतिनिधि कहलाने वाले अधिकांश मंत्री अब तक जैसलमेर आने का समय नहीं निकाल पाए। सरकार की मुखिया स्वयं कई बार ‘जिला दर्शन’ का कार्यक्रम बनाकर जैसलमेर नहीं आई और तनोट व रामदेवरा के दर्शन करने तक ही उनका जैसलमेर से जुड़ाव रहा। यहां उधर, कई बजट घोषणाएं भी अब तक क्रियान्विती की बाट जोह रही हैं।
जैसलमेर इतना दूर?
राजधानी जयपुर से सीमांत शहर जैसलमेर करीब 600 किलोमीटर की दूरी पर है, लेकिन क्या यह दूरी इतनी अधिक है कि, राजस्थान के ज्यादातर मंत्री चार वर्ष में एक बार भी यहां आने की फुर्सत नहीं निकाल पाएं? हकीकत है कि सरकार की मुखिया देवी दर्शनों के अलावा एक बार ही जैसलमेर आई और वह भी बीएसएफ मुख्यालय में केंद्रीय गृहमंत्री की अध्यक्षता वाली सीमा क्षेत्र संबंधी बैठक में भाग लेने। उसी दौरान राज्य के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया भी जैसलमेर आए। कटारिया की यात्रा भी केवल बीएसएफ के इर्द-गिर्द सिमट कर रह गई। इसी तरह से राज्य के केबिनेट मंत्री नंदलाल मीणा, कालीचरण सराफ, राजपाल सिंह शेखावत, सुरेन्द्र गोयल, अरुण चतुर्वेदी, यूनुस खान, डॉ. जसवंतसिंह यादव जैसलमेर नहीं आ पाए। अजयसिंह किलक दो बार तथा किरण माहेश्वरी और राजेन्द्र राठौड़ एक-एक बार जैसलमेर आए तो वन एवं पर्यावरण मंत्री गजेंद्रसिंह खींवसर गत दिनों तीन दिन के जैसलमेर प्रवास पर एक तरह से ‘गोपनीय’ दौरे पर ही रहे। इस तरह से मौजूदा सरकार के एक-तिहाई केबिनेट मंत्री ही जैसलमेर आने का समय निकाल सके। इस तरह 6 में से 3 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्यमंत्री और 5 में से 2

IMAGE CREDIT: patrika

राज्यमंत्री जैसलमेर आ पाए।
कम घोषणाओं का भी क्रियान्वयन पूरा नहीं
राज्य के आम बजट के दौरान राज्य की मुखिया प्रत्येक जिलों के लिए अलग-अलग घोषणाएं करती हैं। वर्ष 2017-18 के बजट के दौरान जैसलमेर जिले के संबंध में 14 घोषणाएं गिनाई गई हैं, जबकि झालावाड़ के लिए 34 घोषणाएं की गईं। गत बजट के समय जैसलमेर के सोनार दुर्ग के संबंध में की गई घोषणा का अभी क्रियान्वयन होना शेष है, वहीं चालू बजटीय वर्ष में आकल वूड फोसिल्स पार्क के विकास पर 5 करोड़ रुपए खर्च करने के अलावा गोडावण संरक्षण के कार्य पूरे होने शेष हैं। शेष कार्य विकास की निरंतर प्रक्रिया के अंतर्गत होने वाली गतिविधियों का हिस्सा है।

फैक्ट फाइल-
-38, 392 वर्ग किमी क्षेत्रफल है जैसलमेर का
-3 पंचायत समितियां है सरहदी जैसलमेर जिले में
-7 लाख के करीब आबादी है जिले की
-4 उपखण्ड शामिल किए गए हैं जैसलमेर जिले में
-140 ग्राम पंचायत वर्तमान में मौजूद है जिले में


...जो कार्य अब तक नहीं हो पाए
विशाल भूभाग वाले जैसलमेर में वर्तमान सरकार और उसके नुमाइंदे एक नई पंचायत समिति गठित नहीं कर पाए। गांवों में नए चिकित्सा केंद्रों की स्थापना, पहले से चल रहे केंद्रों के अपडेशन, पोकरण चिकित्सा केंद्र में ट्रोमा सेंटर की स्थापना, जैसलमेर के जवाहर चिकित्सालय में पहले से निर्मित ट्रोमा सेंटर को शुरू करवाने के मोर्चे पर सरकार ने निराश किया है। चिकित्सकों के पदों पर नियुक्तियां करने में अवश्य जैसलमेर की ओर थोड़ा ध्यान दिया गया है, लेकिन स्कूलों में शिक्षकों की कमी से हजारों बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। जिले के सभी महाविद्यालयों में व्याख्याताओं की इतनी अधिक कमी है कि, ये कॉलेज केवल प्रतिवर्ष छात्रसंघ चुनाव के समय ही महत्व दर्शा पाते हैं। बिजली-पानी-सडक़ के मोर्चों पर भी सरकार जिलावासियों का दिल नहीं जीत पाई है। । नहरों में पानी की मांग को लेकर किसान जब-तब आंदोलन की राह पर चलते नजर आए। बिजली-पानी-सडक़ के मोर्चों पर भी सरकार जिलावासियों का दिल नहीं जीत पाई है।

अनेक विकास कार्य करवाए
जैसलमेर जिले में पिछले चार वर्ष के दौरान ऐतिहासिक उपलब्धियां व कार्य हुए हैं।इस अवधि में 1400 करोड़ के विकास कार्य करवाए गए।गांव-गांव पीने का मीठा पानी पहुंचाने की योजना को गति दी गई तो ढाणी-ढाणी तक बिजली की व्यवस्था की जा रही है।आने वाले समय में नहरी जमीन का सामान्य आबंटन भी करवाया जाएगा।जैसलमेर शहर के विकास को भी पंख लगवाए जा रहे हैं।
-छोटूसिंह भाटी, विधायक, जैसलमेर

महज आंकड़ों की बाजीगरी
वर्तमान सरकार के चार वर्ष के कार्यकाल में केवल आंकड़ों की बाजीगरी ही की जा रही है। धरातल पर कतई काम नहीं हो रहा।60 फीसदी गांवों में जलदाय विभाग की पहले से संचालित योजनाएं विफल है।विद्युत निगम अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रोंं में केवल चार घंटे तक बिजली दे रहा है।जिले में 300 से ज्यादा सरकारी स्कूलें बंद कर दी गई हैं।श्रम विभाग की योजनाओं का लाभ पात्रव्यक्तियों को नहीं मिल पा रहा।
- अंजना मेघवाल, जिला प्रमुख, जैसलमेर