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जैसलमेर(सांकड़ा). पोकरण विधायक भले ही विधानसभा क्षेत्र के विकास के दावे कर रहे हो, लेकिन वे अपने ही गांव की सेहत सुधारने में विफल हो रहे है। हालात यह है कि उनके कार्यकाल से पहले क्रमोन्नत होने के बाद भी सांकड़ा अस्पताल में सुविधाओं के अभाव में ग्रामीणों को उपचार के लिए पोकरण, जैसलमेर व जोधपुर अस्पताल की ओर जाना पड़ता है। गांव के ग्रामीणों को उम्मीद थी कि घरु विधायक आने के बाद उनके गांव के अस्पताल की दशा व दिशा दोनों बदलेगी और बीमारी में उपचार के साधन बढऩे से उन्हें बेहतरीन चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो सकेगी, लेकिन चार साल के कार्यकाल के बाद भी यहां का अस्पताल चिकित्सकों की कमी व अन्य सुविधाओं को तरस रहा है। हालात यह है कि अस्पताल के लिए स्वीकृत बैड भी उपलब्ध नहीं होने से मौसमी बीमारियों की सीजन में मरीजो को उपचार के लिए बैड भी साथ लाना पड़ता है। पर्याप्त चिकित्सकों के अभाव में अस्पताल में उपलब्ध सुविधाओं का भी पूरा लाभ यहां के लोगों को नहीं मिल पा रहा।
यह है हालात
स्थानीय राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में चिकित्सा सेवाओं के अभाव में यहां आने वाले ग्रामीण रोगियों को उपचार की बजाए परेशान होना पड़ रहा है। हालात यह है कि वे सांकड़ा की बजाए पोकरण के सामुदायिक अस्पताल में उपचार करवाने को मजबूर है।
पांच साल पहले क्रमोन्नत
जानकारी के अनुसार सांकड़ा की बढ़ती आबादी को देखते हुए पूर्ववर्ती सरकार ने पांच वर्ष पूर्व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में क्रमोन्नत किया था। जिससे ग्रामीणों को बेहतर चिकित्सा सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन क्रमोन्नति के पांच साल बाद भी यहां पर्याप्त चिकित्सक नहीं लगाए गए। जिससे ग्रामीणों को उपचार के लिए अब भी आर्थिक, मानसिक व शारीरिक परेशानियां कम नहीं हो पा रही।
चिकित्सकों ने करवाई प्रतिनियुक्ति
जानकारी के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र में स्वीकृत चिकित्सकों के पद भरे हुए है, लेकिन दो चिकित्सकों ने प्रतिनियुक्ति लेकर अन्य अस्पतालों में सेवाएं दे रहे है, वहीं महिला विशेषज्ञ चिकित्सक के पद पर नियुक्त चिकित्सक पदभार संभालने के बाद से अवकाश पर है। ऐसे में यहां चिकित्सा सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा।
50 किमी परीधी में नहीं कोई अस्पताल
जानकारों के अनुसार सांकड़ा मुख्यालय पर स्थित राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र पर 50 किमी की परीधी के ग्रामीण उपचार के लिए पहुंचते है। यहां सांकड़ा से भैंसड़ा, भणियाणा, पोकरण, देवीकोट क्षेत्र की 15 ग्राम पंचायतों के 70 से अधिक गांवों के लोगों को उपचार के लिए आते है, लेकिन फिर भी चिकित्सा सुविधाओं का अभाव इन्हें अन्य अस्पताल की ओर जाने को मजबूर कर रहा है। जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन 200 से 300 का आउटडोर रहता है, लेकिन चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ के अभाव के कारण अधिकांश रोगियों को उच्च चिकित्सा के लिए अन्यंत्र जाना पड़ता है। हालात यह है कि चिकित्सा विभाग ने महिलाओं की सुविधा के लिए अस्पताल में स्त्री रोग विशेषज्ञ को नियुक्त किया हुआ है, लेकिन कार्यभार ग्रहण करने के बाद से अवकाश पर है।
बैड साथ लाने की मजबूरी
विभाग की ओर से चिकित्सालय में 30 बैड स्वीकृत है, लेकिन महज 11 बैड ही लगे हुए है। मौसमी बीमारियों व बड़ी दुर्घटना के दौरान मरीजों की संख्यां बढ़ जाने पर मरीजो को स्वयं के स्तर प र बैड की व्यवस्था करना मजबूरी बन गई है।
..ओर यह कर रहे प्रयास
चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ की कमी के बावजूद उपलब्ध चिकित्साकर्मियों के सहयोग से बेहतर चिकित्सा सेवाएं देने के प्रयास किए जा रहे है। रोगियों को उपचार में कमी ना आए इसके लिए स्टॉफ अपनी सेवाएं दे रहे है।
डॉ. मुकेशकुमार, चिकित्साधिकारी राजकीय अस्पताल, सांकड़ा।
Published on:
20 Sept 2017 11:40 pm
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