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पूनमनगर में स्कूल हादसे के बाद मातम…एहतियात के तौर पर जिले के सभी स्कूल 31 तक बंद

ग्रामीणों में विशेषकर अरबाज के परिवारजनों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। उसकी मां और बहनों की रुलाई थमने का नाम नहीं ले रही।

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जैसलमेर जिले के पूनमनगर गांव में राजकीय बालिका उच्च माध्यमिक विद्यालय का प्रवेश द्वार और पत्थर का पिलर गिरने से 7 वर्षीय अरबाज की मौत के दूसरे दिन मंगलवार को भी मातम का माहौल रहा। ग्रामीणों में विशेषकर अरबाज के परिवारजनों में इस घटना को लेकर गहरा रोष है। उसकी मां और बहनों की रुलाई थमने का नाम नहीं ले रही। दो बहनों व एक भाई का सबसे छोटा भाई अरबाज अब इस दुनिया में नहीं है, यह बात उनके दिलो-दिमाग को कचोट रही है। दूसरी ओर जिला प्रशासन ने इस घटना के बाद जिले के सभी राजकीय व निजी स्कूलों व आंगनवाड़ी केंद्रों को तीन दिन के लिए बंद करने का निर्देश जारी किया है। इस अवधि में सभी शिक्षण केंद्रों की तकनीकी टीमों की तरफ से सुरक्षा के लिहाज से जांच की जाएगी।

मातमी माहौल और माहौल में गुस्सा

पूनमनगर में मृतक अरबाज के घर व उसके बाहर मातम पसरा हुआ है। उसके घरवालों को रह-रह कर यह गम सता रहा है कि काश, अरबाज अपनी बहन मधु के साथ घर जाने के लिए उसकी स्कूल नहीं गया होता। अरबाज की बहन बोली, एक साल से गेट टूटा हुआ था…मेरे भाई की जिंदगी छीन ली। अरबाज के पिता तालब खां लोक कलाकार थे, जिनकी मौत कोरोना के दौर में हुई। परिजनों का आरोप है कि उसका मुआवजा आज तक नहीं मिला। मोहल्लेवासियों से सहयोग कर घर चलाने में मदद दी। अरबाज की मां कहती है कि, उसके नन्हें बेटे का क्या कसूर था? पति कोरोना से चला गया और अब बेटा जिम्मेदारों की लापरवाही की भेंट चढ़ गया। अरबाज की नानी का भी बुरा हाल है। दामाद के जाने के बाद खुद को जैसे-तैसे सम्भाला और अब 7 वर्षीय नाती की मौत से वह टूट गई है। आसपास की महिलाएं उन्हें किसी तरह की सांत्वना देने का प्रयास कर रही थी।

विद्यालयों व आंगनवाड़ी केंद्रों में 31 तक अवकाश

दूसरी तरफ मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी जैसलमेर से प्राप्त अनुशंसा के आधार पर जिला प्रशासन ने 29 से 31 जुलाई तक जिले के सभी राजकीय व निजी विद्यालयों सहित समस्त आंगनवाड़ी केन्द्रों में विद्यार्थियों के लिए अवकाश घोषित किया है। सोम व मंगल की मध्यरात्रि को इस आशय का आदेश जारी किया गया। तीन दिनों की अवधि में सभी विद्यालय एवं आंगनवाड़ी भवनों की गहनता से जांच की जाएगी। जिसमें भवनों की संरचनात्मक स्थिरता, प्रवेश द्वार, शौचालय, चारदीवारी, छत सहित अन्य भौतिक सुविधाओं की स्थिति का निरीक्षण किया जाएगा। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि निरीक्षण कार्य समयबद्धता एवं गंभीरता से पूर्ण कर आवश्यक रिपोर्ट जिला प्रशासन को प्रस्तुत करें। जिला कलक्टर प्रताप सिंह ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है और यह सर्वेक्षण इसी दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है। उन्होंने समस्त विभागों, शिक्षा अधिकारियों, प्रधानाचार्यों एवं ग्राम विकास अधिकारियों से अपेक्षा की है कि वे भवन सुरक्षा सर्वेक्षण कार्य में पूर्ण सहयोग प्रदान करें। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी शंकरङ्क्षसह उदावत ने कहा कि प्रशासन के साथ शिक्षा विभाग की तरफ से सभी भवनों की जांच के लिए कवायद शुरू कर दी गई है।