
रामदेवरा कस्बे में पानी से जुड़ी समस्याओं का समय पर समाधान नहीं हो पा रहा है। मुख्य कारण है जलदाय विभाग में लगातार बढ़ती कार्मिकों की कमी। तीन दशक से विभाग में नई भर्ती नहीं हुई, जिसके चलते अधिकांश पद खाली हैं और कामकाज गहराई से प्रभावित है।
करीब 5 किमी क्षेत्र में फैले कस्बे की सुदूर ढाणियों तक पाइप लाइन बिछी है। लाइन टूटने, लीकेज और वाल्व खराब होने जैसी दिक्कतों को दूर करने का दायित्व जलदाय विभाग के कार्मिक निभाते रहे हैं, लेकिन फीटर, लाइनमैन, पंप मैन, प्लंबर और मेसन जैसे पदों पर नई भर्ती न होने से स्थिति गंभीर होती जा रही है। लगातार सेवानिवृत्ति के कारण अब विभाग में केवल 4 कार्मिक बचे हैं, जो करीब 11 हजार आबादी वाले कस्बे की आपूर्ति संभाल रहे हैं।
पानी वितरण व्यवस्था से जुड़े अधिकांश कार्य ठेके पर चल रहे हैं, इसलिए आपूर्ति का बड़ा हिस्सा ठेकेदार के कार्मिक देख रहे हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार 1992 के बाद कोई भर्ती नहीं हुई। उस समय विभाग में 44 हजार से ज्यादा कर्मचारी थे, जो अब घटकर करीब 13 हजार रह गए। बढ़ती आबादी के मुकाबले इस संख्या में भारी कमी स्पष्ट रूप से कामकाज पर प्रभाव डाल रही है। इस स्थिति का सबसे बड़ा असर ग्रामीण क्षेत्रों में दिखता है। कस्बे में तो बिजली नियमित मिल जाती है, लेकिन गांवों में बिजली अक्सर रात में आती है और कर्मचारी संख्या कम होने से पम्प रात में ही चालू करने पड़ते हैं। ऐसे हालात में कर्मचारी 10 से 16 घंटे तक लगातार काम करने को मजबूर हैं। दिन भर पाइप लाइन मरम्मत और रात में आपूर्ति होने से कार्यभार बढ़ता जा रहा है और समय पर समस्याएं दूर नहीं हो पा रही हैं।
Published on:
01 Jan 2026 10:52 pm
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