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यहां आम, नीम, पीपल व बरगद के हरे पेड़ों को काटने पर प्रतिबंध

आम, नीम, पीपल व बरगद केपेड़ों का प्राचीन काल से ही धार्मिक महत्व है और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में इनका बहुत बड़ा योगदान है। इसके अलावा जंगली जानवरों और पक्षियों आदि का निवास स्थान आमतौर पर इन्हीं बड़े पेड़ों पर होता है। पंजाब में नवांशहर के जिला मजिस्ट्रेट ने जिले की सीमा के भीतर बहुत महत्वपूर्ण हरे आम, नीम, पीपल और बरगद के पेड़ों को काटने पर पूर्ण प्रतिबंध का आदेश जारी किया है।

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यहां आम, नीम, पीपल व बरगद के हरे पेड़ों को काटने पर प्रतिबंध

यहां आम, नीम, पीपल व बरगद के हरे पेड़ों को काटने पर प्रतिबंध

पंजाब में नवांशहर के जिला मजिस्ट्रेट ने जिले की सीमा के भीतर बहुत महत्वपूर्ण हरे आम, नीम, पीपल और बरगद के पेड़ों को काटने पर पूर्ण प्रतिबंध का आदेश जारी किया है। इस संबंध में जारी आदेश में कहा गया है कि यदि विशेष परिस्थितियों में उक्त पेड़ों को काटना आवश्यक हो तो वन विभाग की अनुमति से ही काटा जाए। इस प्रयोजन के लिए वन विभाग द्वारा वही प्रक्रिया अपनाई जाएगी, जो पंजाब भूमि संरक्षण अधिनियम, 1900 की धारा-4 और 5 के तहत बंद क्षेत्र में परमिट जारी करने के लिए अपनाई जाती है।

धार्मिक महत्व और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में योगदान

इन आदेशों में कहा गया है कि ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग हरे आम, नीम, पीपल और बरगद के पेड़ों को अनावश्यक रूप से काट रहे हैं। इन पेड़ों का प्राचीन काल से ही धार्मिक महत्व है और पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने में इनका बहुत बड़ा योगदान है। इसके अलावा जंगली जानवरों और पक्षियों आदि का निवास स्थान आमतौर पर इन्हीं बड़े पेड़ों पर होता है। ऐसे पेड़ों के कटने से जहां पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, वहीं पक्षियों के आवास पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त होती जा रही हैं। इस कारण इनकी कटाई को रोकना जरूरी है।

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