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1735 के 2000 रुपए होने से किसानों को राहत

- 15 मार्च से किसान मंडी में बेच सकेंगे समर्थन मूल्य पर गेहूं

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जावरा। समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का दौर शुरु होने से पहले पंजीयन से लेकर सत्यापन का दौर शुरू हो चला है। मुख्यमंत्री ने किसानों का गेहूं समर्थन मूल्य २ हजार रुपए में खरीदें जाने की घोषणा की है। ऐसे में किसानों में इसे लेकर उत्साह है तो पंजीयन करवाने में रुचि भी बढ़ गई है।

गत वर्ष किसानों ने गेहूं को समर्थन मूल्य पर सरकार को बेचने में अरुचि दिखाई थी, ऐसे में कम ही किसानों ने इसके लिए पंजीयन कराया था। ऐसे में इस बार नए किसान पंजीयन कराने पहुंच रहे है। १५ फरवरी तक किसान समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन करा सकेंगे और पूर्व में पंजीकृत किसानों को पंजीयन नहीं कराना पड़ेगा। इसके लिए राजस्व अमला उन पंजीकृत किसानों का सत्यापन कर सत्यापन रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद जानकारी अपडेट होने के साथ गेहूं खरीदी के दौरान उन्हें गेहूं केंद्र पर लाने के लिए सूचना मेसेज पर मिलेगी। १५ मार्च से १५ मई तक सरकार किसानों का गेहूं समर्थन मूल्य पर खरीदेंगी। क्षेत्रके सभी ६ केंद्रों पर गेहंू खरीदी का काम चलेगा।

१७३५ तय समर्थन मूल्य कर रखा था, ऐसे में मंडियों में गेहूं का मूल्य अधिक मिलने के कारण किसान समर्थन मूल्य पर सरकार को देने में अरुचि दिखा रहे थे। सरकार ने समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदी का २ हजार रुपए में करने की घोषणा कर दी है।

राजस्व अमला करेगा सत्यापन
विभाग के एसएस नकवी ने बताया कि समर्थन मूल्य गेहूं खरीदी के लिए किसानों का पंजीयन का दौर चल रहा है। गत वर्ष जिन किसानों ने पंजीयन कराए थे, उनका इस पर भी गेहूं खरीदी के लिए पंजीयन को लेकर राजस्व अमला सत्यापन कर रिपोर्ट सौंपेगा। पहले से पंजीकृत किसानों के पंजीयन और गेहूं की उपज को लेकर सत्यापन रिपोर्ट के बाद इसमें शामिल किया जाएगा। राजस्व विभाग को सत्यापन के लिए कहा गया है।

समर्थन तय कर अंतर का मूल्य चुकाएगी सरकार
जावरा. जून माह में फसल के दाम कम होने को लेकर किसानों की नाराजगी के बाद हुए आंदोलन के बाद शासन ने भावांतर योजना लागू की थी। इसमें सोयाबीन और उड़द को भावांतर में लिया था गया। अब इस बार इसमें रावा, मसूर, चना और प्याज को भी भावांतर में शामिल किया है। पिछले बार प्याज के दामों को लेकर किसानों में खासी नाराजगी थी, इसके बाद सरकार ने किसानों का प्याज खरीदा था। इस बार प्याज को भी भावांतर में रखा है। भावांतर में पहले दो जिंसे थी, इस बार चार जिंसों को शामिल किया है। इन सभी चार जिंसों का समर्थन मूल्य तय करने के बाद किसानों की उपज बिक्री के दौरान आने वाले अंतर को सरकार चुकाएगी। इसके लिए किसानों का पंजीयन का दौर भी शुरु हो चुका है। उपज बेचने के बाद भावांतर में पंजीकृत किसानों को यदि उपज में समर्थन से अंतर आया तो वह राशि सीधे उसके खातें में पहुंचाने का काम किया जाएगा।