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Land Scam In Chhattisgarh: मुख्यमंत्री के गृह जिले में जमीन घोटाले का आरोप, कांग्रेस बोली- नेताओं और अफसरों का गठजोड़, जानें पूरा मामला

Land Mafia in Jashpur: छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के पत्थलगांव में आदिवासी जमीनों के कथित फर्जी नामांतरण और रजिस्ट्री को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है।

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आदिवासी जमीन घोटाले पर बवाल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

आदिवासी जमीन घोटाले पर बवाल (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Land Scam In Chhattisgarh: जशपुर जिले के पत्थलगांव में आदिवासी जमीन घोटाले का बड़ा मामला सामने आया है। पूर्व संसदीय सचिव और कांग्रेस जिला अध्यक्ष यूडी मिंज ने सरकार पर हमला करते हुए मुख्यमंत्री के करीबी नेताओं, सरकारी अफसरों और स्थानीय भू-माफियाओं के, अपवित्र गठजोड़ से आदिवासी जमीनों को प्रभावशाली लोगों के नाम किए जाने का आरोप लगाया।

मिंज के अनुसार, यह सुनियोजित साजिश है। खसरा नंबर 513 व 333 जैसी जमीनों के नक्शों व राजस्व रिकॉर्ड में राजस्व विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत से फेरबदल हुआ। नियमों का दुरुपयोग कर फर्जी रजिस्ट्री कराई जा रही हैं। इस फर्जीवाड़े के खिलाफ आदिवासी समाज में गहरा आक्रोश है।

आदिवासियों ने रैली निकालकर किया तहसील कार्यालय का घेराव

ज्ञात हो कि 4 मई को ही पत्थलगांव में सैकड़ों आदिवासियों ने रैली निकालकर तहसील कार्यालय का घेराव कर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने, आदिवासियों का शोषण बंद करो, जैसे नारे लगाए। पूर्व संसदीय सचिव मिंज ने आरोप लगाया कि कलेक्टर को शिकायत के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने तत्कालीन पटवारी, तहसीलदार, एसडीएम, राजस्व निरीक्षक भाजपा के कुछ नेताओं और तत्कालीन तहसीलदार सहित कई लोगों की भूमिका पर सवाल उठाए। कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने जिला स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। आदिवासी समाज ने जल्द न्याय न मिलने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।

आदिवासी जमीनों के फर्जी नामांतरण के आरोप

4 मई को पत्थलगांव में हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों का आरोप है कि सुनियोजित तरीके से आदिवासी जमीनों के नक्शों में हेरफेर कर नियमों का दुरुपयोग किया जा रहा है, जिससे उनकी जमीनें छीनी जा रही हैं। ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि आदिवासियों को बहला-फुसलाकर उनकी जमीनें प्रभावशाली लोगों द्वारा अपने करीबी आदिवासियों के नाम पर रजिस्ट्री कराई जाती हैं, जबकि वास्तविक कब्जा उन्हीं रसूखदारों का रहता है। प्रदर्शनकारियों ने इसे जमीन लूट का संगठित खेल, करार दिया।

बताया जा रहा है कि, पत्थलगांव के रायगढ़ रोड स्थित चिडऱापारा वार्ड क्रमांक 07 और 08 इस पूरे विवाद का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार, यहां बड़े पैमाने पर जमीन के नक्शों में बदलाव कर जमीनों को छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बेचा गया। इतना ही नहीं, मृत व्यक्तियों के नाम पर भी फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीनों की खरीद-फरोख्त किए जाने के आरोप लगाए गए हैं। फिलहाल, पत्थलगांव में स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। आदिवासी समाज ने साफ कर दिया है कि, जमीन हमारी है, हक भी हमारा ही रहेगा, और यदि जल्द सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।

जांच और कार्रवाई का दिया भरोसा

पत्थलगांव तहसीलदार को ज्ञापन सौंपने गए आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों को प्रशासन की ओर से भरोसा दिया गया कि, हर शिकायत की जांच होगी, गलत रजिस्ट्री निरस्त की जाएगी। इस पूरे मामले में तहसीलदार जयश्री राजनपथे ने कहा कि शिकायतें मिल रही हैं और प्रत्येक मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि जहां भी गलत तरीके से रजिस्ट्री पाई जाएगी, उसे निरस्त किया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।