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नोटबंदी के एक साल, जब पैसे निकालने गये किसान की बैंक की लाइन में ही हुई थी मौत

नोटबंदी के बाद शुरू हुई पैसों की किल्लत से एक महीने में ही सिर्फ पूर्वांचल में ही 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी ।

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Farmer death in bank Queue

किसान की बैंक की लाइन में मौत

वाराणसी/ जौनपुर. कालाधन खत्म करने को लेकर मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले का एक साल पूरा हो गया है। सरकार के इस फैसले कई परिवारों पर आफत बनकर टूटा था। नोटबंदी के बाद शुरू हुई पैसों की किल्लत से एक महीने में ही सिर्फ पूर्वांचल में ही 100 से अधिक लोगों की जान चली गई थी । जौनपुर में बैंक से पैसे निकालने के लिए लाइन में लगे किसान की हर्ट अटैक से मौत हो गई थी।

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केंद्र सरकार के अचानक लिये गये इस फैसले के बाद देश भर में नोटों के लिए मारामारी मच गई थी। फैसले के महीनों बीत जाने के बाद एटीएम और बैंकों में कैश के लिए लोग मारामारी कर रहे थे। बैंकों और एटीएम में लंबी- लंबी लाइनें देखने को मिल रही थी।

जौनपुर के मीरगंज थाना क्षेत्र के बन्धवा बाजार स्थित यूबीआई की शाखा में दिन भर लाइन में खड़े किसान को जब पैसा नहीं मिला तो सदमा लगने से वह बेहोश हो गया। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

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पंवारा थाना क्षेत्र के बामी गांव निवासी मोहन उपाधयाय का यूबीआई बैंक में खाता था । वे पैसा निकालने के लिए सुबह ही आकर लाइन में खड़े हो गये थे, शाम को जब उनका नम्बर आया तों बैंक कर्मी ने पैसा खत्म होने की घोषणा कर दी । यह सुनते ही मोहनलाल बेहोश होकर गिर पड़े । वहां मौजूद लोग उन्हें पास के ही एक निजी डॉक्टर के यहां ले गए। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें लेकर मछलीशहर सीएचसी के लिए रवाना हुए। यहां आने से पहले ही उन्होंने दम दिया । मौत की जानकारी होते ही परिवार में कोहराम मच गया था ।

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