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मुझे उसका मुस्कुराता चेहरा याद आता है – दादी की आंखों में आंसू, अजित पवार के साथ प्लेन क्रैश में बुझा मुस्कुराता सपना

Jaunpur News: महाराष्ट्र के बारामती एयरपोर्ट पर हुए चार्टर्ड प्लेन क्रैश में जौनपुर की फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली समेत पांच लोगों की मौत हो गई। इस हादसे ने उनके परिवार और गांव को गहरे शोक में डुबो दिया।
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जौनपुर

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Mohd Danish

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Updated: 29 Jan 2026, 8:52 PM IST

pinky mali plane crash ajit pawar jaunpur

मुझे उसका मुस्कुराता चेहरा याद आता है | Image Video Grab

Pinky mali plane crash Jaunpur: महाराष्ट्र के पुणे में हुए भीषण विमान हादसे ने जौनपुर की रहने वाली फ्लाइट अटेंडेंट पिंकी माली की जिंदगी छीन ली। यह हादसा उस वक्त हुआ जब डिप्टी मुख्यमंत्री अजित पवार का चार्टर्ड प्लेन बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग कर रहा था। हादसे की खबर जैसे ही परिवार तक पहुंची, जौनपुर के केराकत तहसील के भैंसा गांव में सन्नाटा पसर गया। हर घर में सिर्फ एक ही चर्चा थी, पिंकी अब इस दुनिया में नहीं रही। गांव की गलियों में खामोशी और आंखों में आंसुओं का सैलाब देखने को मिला।

पुणे में अंतिम विदाई की तैयारी

पिंकी के पिता शिवकुमार ने भावुक होते हुए बताया कि बेटी का शव परिवार को सौंप दिया गया है और उसे पुणे स्थित उनके घर लाया गया है। वहीं अंतिम संस्कार किया जाएगा। परिवार के अन्य सदस्यों को फिलहाल पुणे आने से मना किया गया है, ताकि प्रक्रिया शांति से पूरी की जा सके। अंतिम संस्कार के बाद पिंकी की अस्थियों को वाराणसी ले जाकर गंगा में विसर्जित किया जाएगा। पिता की आवाज कांप रही थी, जब उन्होंने कहा कि बेटी को खोने का दर्द शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

दादी की सिसकियां

80 वर्षीय दादी महाराजी की आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे। उन्होंने बताया कि वह सुबह मंदिर गई थीं, तभी गांव वालों से हादसे की खबर मिली। उन्होंने तुरंत अपने बेटे को फोन किया, जो उस समय पुणे में था। दादी ने कहा कि उनका बेटा फोन पर फूट-फूट कर रो रहा था और बस यही कह पाया कि पता नहीं पिंकी कहां चली गई। दादी बार-बार यही दोहरा रही थीं कि उनकी पोती कितनी खुशमिजाज थी और उसका मुस्कुराता चेहरा हमेशा याद आता रहेगा।

मुंबई से जौनपुर तक रिश्तों की डोर

पिंकी का परिवार पिछले कई वर्षों से मुंबई के वर्ली इलाके में रह रहा है। उनके पिता शिवकुमार टैक्सी चलाते हैं और शिवसेना से जुड़े हुए हैं। जौनपुर में परिवार के अन्य सदस्य रहते हैं, जो टीवी चैनलों के जरिए हादसे की खबर मिलने के बाद से सदमे में हैं। गांव के लोगों ने कई बार माता-पिता को फोन करने की कोशिश की, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। बाद में पिता से बात होने पर पूरे परिवार में रो-रोकर बुरा हाल हो गया।

शिक्षा से आसमान तक का सफर

परिवार के अनुसार, पिंकी माली चार भाइयों वाले परिवार में सबसे बड़ी पोती थीं। उन्होंने मुंबई के तुलसी मानक कॉलेज, दादर से इंटरमीडिएट की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने एयर होस्टेस बनने का सपना देखा और इसके लिए विशेष प्रशिक्षण लिया। करीब चार साल तक मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर काम किया और पिछले पांच वर्षों से चार्टर्ड प्लेन में फ्लाइट अटेंडेंट के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थीं। पिंकी अपने काम को लेकर बेहद गर्व महसूस करती थीं और परिवार को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती थीं।

पिता से आखिरी बातचीत का दर्द

हादसे से एक दिन पहले पिंकी ने अपने पिता से फोन पर बात की थी। पिता ने बताया कि बेटी बहुत खुश लग रही थी और उसने कहा था, “पापा, आज अजित पवार के साथ फ्लाइट है, आपसे बात कराऊंगी।” पिता को क्या पता था कि यही उनकी आखिरी बातचीत होगी। अगले दिन सुबह हादसे की खबर ने उनके जीवन को पूरी तरह बदल दिया। भाई करन ने भी बताया कि पिंकी ने बुधवार सुबह फोन कर कहा था कि वह बारामती से नांदेड़ जा रही है, इसके बाद कोई कॉल या मैसेज नहीं आया।

कैसे हुआ भयावह हादसा

महाराष्ट्र एविएशन डिपार्टमेंट के मुताबिक, बुधवार सुबह 8:45 बजे विमान बारामती एयरपोर्ट पर लैंडिंग के लिए अप्रोच कर रहा था। पहली बार पायलट को रनवे स्पष्ट दिखाई नहीं दिया, इसलिए विमान को दोबारा ऊंचाई पर ले जाया गया। दूसरी बार रनवे-11 पर लैंडिंग की कोशिश की गई, लेकिन इसी दौरान विमान फिसलकर क्रैश हो गया। टकराते ही विमान में आग लग गई। इस हादसे में अजित पवार, उनके सुरक्षाकर्मी, दो पायलट और क्रू मेंबर पिंकी माली समेत कुल पांच लोगों की जान चली गई।

चुनावी दौरे पर निकले थे अजित पवार

जानकारी के अनुसार, अजित पवार महाराष्ट्र पंचायत चुनाव के लिए जनसभा को संबोधित करने बारामती जा रहे थे। उनका चार्टर्ड विमान सुबह के समय ही पुणे से रवाना हुआ था। हादसे के बाद पूरे राज्य में शोक की लहर दौड़ गई। राजनीतिक गलियारों से लेकर आम जनता तक, सभी ने इस दुखद घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया।

गांव की हर आंख नम

जौनपुर के भैंसा गांव में पिंकी की मौत की खबर फैलते ही लोग उनके घर के बाहर इकट्ठा हो गए। हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन माहौल गमगीन बना रहा। गांव के बुजुर्गों का कहना है कि पिंकी पूरे इलाके की बेटियों के लिए प्रेरणा थीं, जिन्होंने अपने सपनों को मेहनत और लगन से ऊंचाई तक पहुंचाया। आज वही गांव उनकी याद में आंसुओं से भीगा हुआ है।

यादों में जिंदा रहेगी पिंकी

परिवार और गांव वालों के लिए पिंकी सिर्फ एक फ्लाइट अटेंडेंट नहीं, बल्कि उम्मीद और आत्मविश्वास की मिसाल थीं। उनकी मुस्कान, उनका आत्मबल और उनका संघर्ष हमेशा लोगों के दिलों में जिंदा रहेगा। इस हादसे ने एक परिवार से बेटी, एक गांव से गर्व और देश से एक मेहनती युवा को छीन लिया है, जिसकी कमी शायद कभी पूरी नहीं हो पाएगी।

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