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मछलीशहर लोकसभा: भाजपा के विजय रथ को रोकना गठबंधन के लिए चुनौती

नौ साल से पुल की समस्या से जूझ रहा मछलीशहर

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Machhali shahar Tehshil

Machhali shahar Tehshil

जौनपुर. पूर्वी उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में स्थित मछलीशहर को तहसील का दर्जा प्राप्त है। नेशनल हाइवे 31 मछलीशहर से होकर गुजरता है जो पश्चिमी तरफ प्रतापगढ़ रायबरेली और लखनऊ को मछलीशहर से जोड़ता है तो पूर्वी तरफ जौनपुर और बनारस से मछलीशहर को जोड़ता है। मछलीशहर सुरक्षित लोकसभा सीट है जिसके तहत चार विधानसभा आती हैं। मछलीशहर, मड़ियाहूं, जफराबाद, केराकत। चुंगी चौराहे से लेकर सुजानगंज चौराहे तक मछलीशहर बाजार फैला हुआ है। यहां पर अधिकतर घरों में प्रथमतल पर दुकानें हैं। इसी कारण से मछलीशहर का नगरीकरण वर्टिकल है। यहां जनसंख्या घनत्व दिल्ली से भी ज्यादा है।

मछलीशहर संसदीय सीट पर लड़ाई रोचक हो गई है। पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे बसपा के बीपी सरोज पर इस बार भाजपा ने दांव लगाया है, जो चुनाव हारने के बाद भी जनता के बीच रहे और ऐन वक्त पर भगवाधारी हो गए। ऐसे में इस सीट पर भाजपा का पलटा कुछ भारी नजर आ रहा है, लेकिन सपा-बसपा गठबंधन से इंजीनियर टी राम चुनावी मैदान में हैं।

कांग्रेस का नहीं खत्म हो रहा वनवास
इस सीट के मतदाता दलों को ताश के पत्तों की तरह फेंटते रहे हैं। बात अगर प्रारंभ के तीन चुनाव की करें तो कांग्रेस का परचम लहराया। इसके बाद बीएलडी, जनता पार्टी, जनता दल, भाजपा और फिर बसपा-सपा ने बाजी मारी। कांग्रेस वनवास तीस साल से खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा। इस सीट के निर्णायक पिछड़े और दलित मतदाता हैं।


यहीं से जीतने के बाद पीएम बने थे पं. नेहरू
देश में हुए पहले आम चुनाव में मछलीशहर फूलपुर संसदीय क्षेत्र में था। उस समय फूलपुर से जवाहर लाल नेहरू चुनाव जीते थे, जो देश के पहले प्रधानमंत्री बने थे। 1962 में मछलीशहर सीट स्वतंत्र लोकसभा क्षेत्र के रूप में अस्तित्व में आ गई। इस सीट का परिसीमन कई बार समय-समय पर बदलता रहा। मौजूदा समय में मछलीशहर, मडिय़ाहूं, जफराबाद, केराकत और वाराणसी का पिंडरा विधानसभा क्षेत्र आता है। 2009 के चुनाव से यह सीट सुरक्षित श्रेणी में आ गई है।

मछलीशहर लोकसभा क्षेत्र






























लोकसभा क्षेत्रपुरूषमहिला
मड़ियाहूं166524146226
मछलीशहर198401174042
जफराबाद195900173868
केराकत203468193519


अब तक मछली शहर के सांसद











































































सन्सांसदपार्टी
1962गनपत रामकांग्रेस
1967मंगेश्वरकांग्रेस
1971नागेश्वर द्विवेदीकांग्रेस
1977राज केशर सिंहबीएलडी
1980शिव शरन वर्माजेएनपी
1984श्रीपत मिश्रकांग्रेस
1991शिव शरन वर्माजनता दल
1996राम विलास वेदांतीभाजपा
1998चिन्मयानंदभाजपा
1999चंद्रनाथ सिंहसपा
2004उमाकांत यादवबीएसपी
2009सरोज तूफानीसपा
2014राम चरित्र निषादभाजपा

पिछले चुनाव पर एक नजर





















































































प्रत्याशीपार्टीमत
रामचरित्र निषादभाजपा438210
बीपी सरोजबसपा266055
तूफानी सरोजसपा191387
तूफानी निषादभारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस36275
सुबास चंद्रकम्युनिस्ट पार्टी आफ इंडिया18777
वीरेंद्र कुमार सोनकरआम आदमी पार्टी9223
श्रवण कुमार पासवाननिर्दल7833
हरिनाथनिर्दल5269
राजेश सोनकरनिर्दल4362
ओम प्रकाशनिर्दल2608
हरीसुभासपा2669
सिकंदरबहुजन मुक्ति मोर्चा2114
राजेशजनता दल(यू)1552
लालजीभारतीय शक्ति चेतना पार्टी1543
सुरेश गौतमआदर्श राष्ट्रीय विकास पार्टी1467

मछलीशहर के लोगों के लिे पुल नहीं बनना है बड़ी समस्या
केराकत क्षेत्र के अंतर्गत मई गांव में 15 साल गुजर जाने के बाद भी उसकी टीस बरकार है। 2004 नाव से नदी पार करते वक़्त नाव डूब जाने से पांच से छह लोगों को मौत हो गई थी।वर्तमान में भी यहां के लोगो को नदी पार कर जिला मुख्यालय जाने के लिए नाव का सहारा लेना पड़ता है या फिर 30 किलोमीटर की अधिक दूरी तय करनी पड़ती है। अगर ये पुल बन जाता है तो जिलामुख्यालय जाने के लिए लोगो के मात्र 18 से 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ेगी।
पंद्रह वर्ष पूर्व ग्रामीणों के विरोध प्रदर्शन के बाद बसपा शासन काल मे पुल की स्वीकृति मिली। जो 9 साल बीत जाने के बाद भी आज तक तैयार नही हो पाया। आस-पास के गांव के ग्रामीणों ने पुल का काम पूरा किए जाने को लेकर विरोध प्रदर्शन किया और शासन को चेतवानी दी कि पुल नहीं तो वोट नहीं ।

क्षेत्र के मई घाट पर दो दर्जन गाव के लोगो की सुविधा को ध्यान में रखते हुए 15 सितंबर 2011 में तत्कालीन बसपा सरकार में 4 करोड़ 22 लाख की लागत से नाबार्ड वित्त पोषित योजना के अंतर्गत मई पसेवा मार्ग पर बसपा सरकार के मंत्री निसिमुद्दीन सिद्दीकी ने इस पुल की नींव रखी थी। जिसका समय भी 18 महीने निर्धारित किया गया था, लेकिन 9 साल बीत जाने के बाद भी पुल का निर्माण कार्य अधूरा है और काम पूरी तरह बंद है। जिससे ग्रामीणों में नाराजगी है।

BY-Javed Ahmed

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