काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब कोई नहीं आया और बच्ची रोने लगी तो दूसरी महिला ने बच्ची को दूध भी पिलाया
झाबुआ. मेघनगर जाने के लिए मंगलवार सुबह बस का इंतजार करने यात्री प्रतीक्षालय में बैठे पति-पत्नी को अज्ञात लोगों ने बच्ची संभालने के लिए दी। इसके बाद उस बच्चे को लेने के लिए कोई नहीं आया तो दंपती ने बस स्टैंड पर मौजूद चालक परिचालकों से मदद ली। इसके बाद पुलिस वहां पर पहुंची और बच्ची को एनएससीयू पहुंचाया। बच्ची की स्थिति देखकर डॉक्टर ने बच्ची को भर्ती कर लिया। यात्री प्रतीक्षालय में राजू भूरिया एवं उनकी पत्नी पार्वती मेघनगर जाने के लिए बस का इंतजार कर रहे थे। मंगलवार सुबह 10:30 बजे प्रतीक्षालय में एक महिला और एक आदमी आए।
इनके हाथ में एक बच्ची भी थी। अंदर आने के बाद वह औरत आदमी से झगड़ा करने लगी और वहां से नाराज़ होकर चली गई। आदमी के गोद में बच्चा था उस आदमी ने उस औरत को अपनी भाभी बताया और मनाकर लाने का कहकर बच्ची राजू और पार्वती को देकर चला गया। काफी देर इंतजार करने के बाद भी जब कोई नहीं आया और बच्ची रोने लगी तो पार्वती ने बच्चे को दूध भी पिलाया, लेकिन जब बच्ची कमजोर दिखाई दी तो अपने साथ हुई इस घटना की जानकारी वहां मौजूद निजी बस चालक परिचालक संघ के मुजीब कुरैशी हाजी लाला को बताया। इसके बाद पुलिस की मदद से बच्ची को चिकित्सालय में डॉक्टर को दिखाया।
वहां मौजूद ड्यूटी डॉक्टर ने बताया कि बच्ची 8 माह की होने के कारण कमजोर है एवं इसमें पीलिया के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इसलिए इसे भर्ती करना पड़ेगा। इसके बाद पुलिस सीसीटीवी कैमरे में आरोपितों की पहचान करने के लिए राजू एवं पार्वती को थाने लेकर पहुंची। सीसीटीवी कैमरे में बच्ची को छोडऩे वाले की पहचान शुरू की पर हो नहीं पाई।
बच्चा गिरोह का भी लग सकता है पता
प्रत्यक्षदर्शी हाजी लाला ने बताया कि 10.30 बजे उन्होंने बस स्टैंड पर मांगने वाले एक महिला के हाथ में सुंदर सी बच्ची को देखा तो शक हुआ कि इतनी सुंदर बच्ची ऐसी महिला के पास कैसे हो सकती है। इसके बाद दोनों को झगड़ता देखा तब बच्ची नहीं थी। इस मामले को तह तक खोजा जाए तो इस एरिया में काम कर रहे बच्चा गिरोह का पता भी लग सकता है।
बचाने का पूरा प्रयास कर रहे
&बच्ची को पीलिया है। बच्ची प्रीमेच्योर है और उसका वजन भी 1 किलो 900 ग्राम है । बच्ची को उसकी मां ने ठीक से फीडिंग नहीं कराई। इस कारण बच्ची कमजोर है। बच्ची को बचाने का पूरा प्रयास कर रहे हैं।
-डॉ आईएस चौहान, जिला अस्पताल