
झालावाड़.राजस्थान पत्रिका के कोटा संस्करण के 40 वें स्थापना दिवस के अवसर पर शहीद निर्भय सिंह सर्किल के पास समाजिक सरोकारों में पत्रिका योगदान विषय पर संगोष्ठी में वक्ताओं ने एक सुर में पत्रिका की पत्रकारिता को निष्पक्षता की मिसाल बताया। जन सरोकार से जुटे विषयों को प्रमुखता से प्रकाशित करने की पत्रिका की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। पाठकों से संवाद करने, उन्हें सर्वोपरि मानने के अपने अनुभव साझा किए। संगोष्ठी में समाजसेवा व उद्यमी महिलाओं ने पाठक के तौर पर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। इस मौके पर संगोष्ठी में पाठक महिलाओं ने कहा कि सामाजिक सरोकार से लेकर चाहे वो पर्यावरण संरक्षण का मसला हो या फिर जनसमस्याएं, पत्रिका ने हमेशा अग्रणी भूमिका निभाई है। बगैर किसी राजनीतिक हित के विश्वसनीय खबरों के ही कारण पत्रिका पाठकों की पहली पसंद है।
ऐसे रखे अपने विचार-
पत्रिका में प्रकाशित बेबाक, निष्पक्ष खबरें ही इसे औरों से अलग करती है। 30 वर्षों से में पत्रिका पढ़ रही हूं। पत्रिका सामाजिक सरोकारों से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाता रहा हैं। जैसे अभी दरा जाम को लेकर पत्रिका ने अभियान चला रखा है, इस पर सरकार ने भी ध्यान दिया।
पत्रिका की वजह से आज देश-विदेशों में झालावाड़ की पहचान है। पत्रिका अमृतम-जलम, हरियाली राजस्थान जैसे अभियान चलाकर आमजन को जागरूक कर पर्यावरण संरक्षण का काम कर रहा है। हाल में साइबर फ्रॉड जैसे कई अभियान से कई लोग ठगे जाने से बच रहे। पत्रिका ऐसे ही कार्य करता रहे।
पत्रिका ने सही मायने में लोकतंत्र के चौथे प्रहरी की भूमिका निभाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। पत्रिका में सुडोकू, बच्चों के लिए पहनियां व कई जानकारी का खजाना होता है। मेरी सुबह पत्रिका से ही होती है। पत्रिका विश्वास का नाम है।
सामाजिक सरोकार से जुड़े खबरों को जिस तरह से पत्रिका में अहमियत दी जाती है उस तरह अन्य अखबारों में जगह नहीं मिलती। झालावाड़ शहर में रोड व जन समस्याओं को पत्रिका अच्छे से उठाता है, स्थापना दिवस पर साधुवाद। पत्रिका ऐसे ही काम करता रहे।
पत्रिका का जो पौधा श्रद्धेय कुलिशजी ने लगाया था वह आज एक विशाल वट वृक्ष बन गया है। राजस्थान से शुरू इस अखबार ने आज देश के कई प्रमुख शहरों में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। झालावाड़ में बड़बेला जैसे स्थानों के बारे में हमें अखबार से ही पता चला है, जिले में ऐसे भी स्थान है। जिले के विकास में पत्रिका का अहम योगदान है।
पत्रिका की अपनी एक खास गरिमा है। पत्रिका में ये नहीं सोचना पढ़ता कि क्या पढऩा। पत्रिका में बहुत ही सारसंक्षिप्त व पढऩीय खबरें आती है।खासकर कोरोना काल में जब महामारी चरम पर थी तब इसने सही मायने में जनसमस्या को जिस तरह उजागर किया वह काबिले तारीफ है। कोटा संस्करण के 40 वें स्थापना दिवस पर सभी को बधाई।
पत्रिका की सबसे खास बात इसकी रोचक,सम-सामयिक खबरें और सामाजिक कार्यक्रमों को तरजीह देना है। पत्रिका में हमें कॅरियर संबंधी कई जानकारियां मिलती है।
Published on:
10 Mar 2025 11:34 am

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