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Kota Stone, Sand Stone…कोटा स्टोन और सेण्ड स्टोन की बंद खदानों से तर हो सकते कंठ

. बारिश में पानी से लबालब हो जाती खानें, खाली कराने के लिए खर्च करने पड़ते लाखों रुपए. सरकार का पानी सहेजने का स्लोगन, पर अमूल्य नीर को नालों में बहाना पड़ता है. हाड़ौती में उच्च गुणवत्ता का लाइम और सेण्ड स्टोन निकलता है

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Kota Stone, Sand Stone...कोटा स्टोन और सेण्ड स्टोन की बंद खदानों से तर हो सकते कंठ

Kota Stone, Sand Stone...कोटा स्टोन और सेण्ड स्टोन की बंद खदानों से तर हो सकते कंठ

झालावाड़. हाड़ौती में उच्च गुणवत्ता का लाइम स्टोन (कोटा स्टोन) और सेण्ड स्टोन निकलता है। धरती को चीरकर खदानों से पत्थर निकाला जाता है। बारिश में ये खदानें पानी से लबालब हो जाती है। फिर से खनन के लिए पानी निकालने के लिए खान मालिकों को लाखों रुपए खर्च करना पड़ते हैं। यदि शासन और प्रशासन खानों में भरने वाले पानी का सदुपयोग करें तो क्षेत्र में पानी की किल्लत दूर हो सकती है। सैकड़ों लोगों के कंठ तर हो सकते हैं। झालावाड़, कोटा और बूंदी जिले के बरड़ क्षेत्र में पत्थर निकालने के कारण खानें सैकड़ों फीट गहरी हैं। मानसून की विदाई के बाद बड़े इंजन सेट लगाकर खानों से पानी निकाला जाता है। इसमें डेढ़़ से दो माह तक लग जाते हैं। करीब चार माह खदानों में काम बंद रहता है। हाड़ौती में कोटा स्टोन और सेण्ड स्टोन की करीब चार सौ खाने हैं।
पानी खाली कराने पर मोटा खर्च
उद्यमियों का कहना है कि पानी खाली करवाने के लिए एक खदान पर करीब दस लाख रुपए खर्च करने पड़ते हैं। इस बार तो डीजल के दाम आसमान पहुंच गए हैं। इस कारण खर्चा और बढ़ गया है।
बारिश थमते ही पानी का संकट
झालावाड़ जिले के खनिज क्षेत्र तथा कोटा जिले के रामगंजमंडी, सुकेत, ढाबादेह, रूणजी, कुम्भकोट में बारिश थमते ही पानी का संकट गहरा जाता है। यदि खानों के पानी के उपयोग के लिए सरकार की योजना बने तो पूरे सालभर एक खान से 500 घरों की आबादी के पानी को पर्याप्त पानी उपलब्ध हो सकता है। इस पानी का सिंचाई में भी उपयोग किया जा सकता है।
आपस में जोडऩे की योजना बनें
विशेषज्ञों के मुताबिक, रामगंजमंडी और झालावाड़ में दो दर्जन से अधिक खदानें बंद पड़ी है। इन खदानों को आपस में जोड़कर (इंटर लिंक) करने की जरूरत है। पानी पर्याप्त पानी आ सके। इसके बाद पेजयल, औद्योगिक उपयोग के लिए पानी का उपयोग किया जा सकता है। हाडौती कोटा स्टोन इण्डस्ट्रीज एसोसिएशन के अध्यक्ष आनएन गर्ग के अनुसार डीजल महंगा होने के कारण इस बार पानी की छड़ाई भारी पड़ेगी। इस बार मानसून देर तक सक्रिय रहने से अक्टूबर के अंत तक ही खानों में काम शुरू होने की संभावना है। जिला उद्योग केन्द्र के महाप्रबंधक हरिमोहन शर्मा के अनुसार पत्थर उद्यमियों से चर्चा के दौरान इस संबंध में सुझाव भी आए हैं। उद्यमी संवाद पर इस पर चर्चा की जाएगी।

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