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….मंहगाई की मार से होली है बेहाल

काशीराम सेन की रचना- 'मंहगी गुजिया की मिठास, मंहगा बहुत गुलाल, मंहगाई की मार से होली है बेहाल' खूब पसंद की गई।

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Hariom Dwivedi

Mar 21, 2016

Kavi sammelan

Kavi sammelan

झांसी.
होली के अवसर पर कवियों ने काव्य रस की रंगभरी फुहारों से माहौल को रंगीन बनाने के लिए अपनी-अपनी प्रस्तुतियां दीं। किसी ने प्रेम रस की फुहारें छोड़ीं, तो किसी ने हास्य रस की। इस मौके पर कवियों ने अलग-अलग तरह की रंग भरी रचनाएं प्रस्तुत कर खूब वाहवाही लूटी। इसी मौके पर काशीराम सेन की रचना- 'मंहगी गुजिया की मिठास, मंहगा बहुत गुलाल, मंहगाई की मार से होली है बेहाल' खूब पसंद की गई।


इन कवियों ने प्रस्तुत की रचनाएं

बुंदेलखंड साहित्य संगीत कला संस्थान के तत्वावधान में संस्थान के अध्यक्ष रवीश त्रिपाठी ने इस कवि सम्मेलन का आयोजन किया। इसमें मुख्य अतिथि मनमोहन गेड़ा रहे। अध्यक्षता आचार्य हरिओम पाठक ने की। विशिष्ट अतिथि पं.कालीचरन जारौलिया रहे। इस अवसर पर गुनगुन पाठक ने मां सरस्वती की वंदना के कार्यक्रम का शुभारंभ किया। इस दौरान डा.गौरीशंकर उपाध्याय सरल ने आज यह होली मिलन ऐसा मनाओ दोस्तो, भूलकर गिले शिकवे दिलों से दिल मिलाओ दोस्तो रचना प्रस्तुत की। वहीं कवि अवधेश, सुखराम चतुर्वेदी, राजेंद्र तिवारी, श्रीमती सुमन मिश्रा, रामप्रकाश गोस्वामी, अखिलेश नारायण त्रिपाठी, मुवीन कोंचवी, ओमप्रकाश हयारण दर्द, कृष्ण मुरारी श्रीवास्तव, नाथूराम शर्मा और मोहन सोनी आदि ने होली की रंग-बिरंगी रचनाएं प्रस्तुत कीं।


ये लोग रहे उपस्थित

इस अवसर पर डा.चंद्रशेखर वर्मा, अखिलेश पांडेय, अंकुर अग्रवाल, बाबूलाल जारौलिया, महेश उपाध्याय, मोतीलाल वर्मा, महेश पांडेय, रजत त्रिपाठी, रामबाबू वर्मा, शालिगराम सविता, सौरभ रावत भांजे आदि उपस्थित रहे।

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