Volleyball झुंझुनूं. वॉलीबाॅल में बेटे ही नहीं जिले की बेटियां भी नाम कमा रही हैं। वे हर दिन मैदान में पसीना बहा रही है और जिले से आगे पहुंचकर स्टेट व नेशनल में पदक जीत रही हैं। जिला स्वर्ण जयंती स्टेडियम झुंझुनूं, गांव धमोरा, भोड़की, जाखड़ों की ढाणी, डूंडलोद, कारी, भगीना, देवरोड़, ढाणियां भोड़की, बनगोठड़ी सहित दर्जनों गांव ऐसे हैं जहां की बेटियां वॉलीबाॅल में स्टेट व नेशनल में पदक जीत रही हैं। वे हर दिन सुबह शाम मैदान में तैयारी कर रही हैं। खास बात यह है कि माता-पिता भी अपनी बेटियों के सपनों को पूरा करने के लिए पूरा सहयोग कर रहे हैं।
राजस्थान के झुंझुनूं जिले की जाखड़ों की ढाणी की मीमांसा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेल चुकी। ढाणियां भोड़की की वॉलीबाॅल की नेशनल प्लेयर मनेश गिल पुलिस में इंस्पेक्टर है। बिजारणिया की ढाणी की मंजू वॉलीबाॅल खेलकर पीटीआई बन चुकी। अब वह भी वॉलीबाॅल की ट्रेनिंग दे रही है। देवरोड की सोनू स्कूल जूनियर नेशनल खेल चुकी, अब सीनियर की तैयारी कर रही है। इसी प्रकार काजला की सुनीता, श्यामपुरा मैनाना की सुनीता, जाखड़ों की ढाणी की सरोज, कृष्णा गिल, ललिता व सरिता सहित अनेक खिलाड़ी वॉलीबाॅल में नाम कमा चुकी।
सगी बहनें भी जीत रही
डूंडलोद गांव की सगी बहन स्मृति और टीना दोनों वॉलीबाॅल की अच्छी खिलाड़ी हैं। टीना जूनियर नेशनल में पदक जीत चुकी। स्मृति इंटर यूनिवर्सिटी वेस्ट जोन व सीनियर नेशनल खेल चुकी। निशा व सोनू सगी बहनें हैं, दोनों स्टेट में खेल चुकी, अब नेशनल में पदक जीतने की तैयारी कर रही हैं।
यह हैं उभरती स्टार
कारी गांव की अंजली व प्रियंका स्टेट व अन्य प्रतियोगिताओं में खेल चुकी। इसी गांव की कविता व विनिता इंटर यूनिवसिर्टी में वेस्ट जोन में खेल चुकी। धायलों का बास की उजाला जूनियर नेशनल खेल चुकी। धमोरा की शृष्ठी जाखड़ ने बताया कि वह जिला स्टेडियम में नियमित तैयारी कर रही है। स्कूल की तरफ से स्टेट खेल चुकी। अब सपना नेशनल में पदक जीतने का है। सीतसर गांव की उषा व सीनियर स्टेट में खेल चुकी मोनिका ने बताया कि जिले में खेलों का माहौल बेहतर हो रहा है, लेकिन रीट में भी खिलाडि़यों को दो प्रतिशत आरक्षण दिया जाना चाहिए।
बने वॉलीबाॅल एकेडमी
पूरे राजस्थान में लड़कियों की वॉलीबाॅल की सरकारी एकेडमी केवल जयपुर में है। इसके अलावा कहीं नहीं है। खिलाडि़यों का कहना है कि अगर झुंझुनूं में लड़कियों की वॉलीबाॅल एकेडमी बन जाए तो वे और आगे बढ़ सकती हैं। जिले का नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कमा सकती हैं।
इनका कहना है
जिले की लड़कियां वॉलीबाॅल में नाम कमा रही हैं। दर्जनों ऐसे गांव हैं, जहां की अनेक बेटियां वॉलीबाॅल में नेशनल खेल चुकी। केवल खेल ही नहीं रही, बल्कि पदक भी जीत रही हैं। लड़कियों में वॉलीबाॅल के प्रति जोरदार क्रेज है। अब जिले में बालिकाओं के लिए सरकारी वॉलीबाॅल एकेडमी खुल जाए तो इससे और फायदा होगा।
–नीलम, एनआईएस कोच