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राजस्थान में कृषि विश्वविद्यालय को मिली बड़ी कामयाबी, फसलों को लेकर किया ऐसा अनोख प्रयोग

Rajasthan News: सुपर फूड में शामिल चिया व राजगिरा की फसल भी क्षमतावान फसलों के अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान तंत्र परियोजना की राष्ट्र स्तरीय बैठक में चिन्हित की गई।

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Rajasthan News: कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर शोध कार्यों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इसी का नतीजा है कि विवि की ओर से विकसित विभिन्न फसलों की नई किस्में राज्य व राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाएंगी। विश्वविद्यालय ने एक वर्ष में ही विभिन्न फसलों की 10 प्रमुख किस्में विकसित की हैं। हाल ही में संपन्न हुई कृषि व उद्यानिकी फसलों की राज्य स्तरीय बीज समिति की बैठक में विश्वविद्यालय की आठ किस्में एक साथ अधिसूचित करने के लिए चिन्हित की गई हैं।

देश की पहली चिया की किस्म

विश्वविद्यालय ने देश की पहली चिया की किस्म जोधपुर चिया-1 विकसित की है। कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर देशभर में चिया पर काम करने वाले गिने-चुने संस्थानों में से एक है।

राजगिरा की राष्ट्रीय स्तर पर दो किस्में

राष्ट्रीय स्तर पर राजगिरा की जोधपुर राजगिरा 1 और 2 विकसित की गई। दोनों किस्मों में लगभग 12 प्रतिशत प्रोटीन है। जोधपुर राजगिरा-1 को सपूर्ण राजस्थान, गुजरात, उड़ीसा, उत्तरप्रदेश और छत्तीसगढ़ के कुछ क्षेत्रों में तथा जोधपुर राजगिरा- 2 को सपूर्ण राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, झारखण्ड, उड़ीसा, महाराष्ट्र और उत्तरप्रदेश में चिन्हित किया गया है।

राई की दो किस्में विकसित की

विश्वविद्यालय ने राया व सरसों अनुसंधान के क्षेत्र में भाभा परमाणु अनुसंधान संस्थान (बार्क), ट्रोबे, मुंबई के साथ मिलकर राई की दो किस्में ट्रोबे जोधपुर मस्टर्ड 1 और तथा गेहूं की एक किस्म ट्रोबे जोधपुर व्हीट 153 विकसित की है। वहीं, पीली सरसों की दो किस्में जोधपुर येलो सरसों 1 और 2 विकसित की हैं। इनके अलावा अरंडी की उच्च तेल मात्रा वाली संकर किस्म विकसित की है।

असालिया राजस्थान की पहली किस्म

विश्वविद्यालय ने असालिया की राजस्थान की पहली किस्म जोधपुर असालिया-1 विकसित की है, जिसकी औसत उपज 11-15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है।

विवि ने सुपर फूड पर कार्य कर चिया, असालिया व राजगिरा जैसी फसलों की नई किस्में विकसित की हैं। किसानों को जल्द ही नवीन किस्मों के बीज उपलब्ध करवाए जाएंगे।

डॉ. बीआर चौधरी, कुलपति, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर

विवि की ओर से पश्चिमी राजस्थान सहित देशभर के किसानों की आवश्यकता तथा मांग को ध्यान में रखते हुए नई किस्में विकसित की गई हैं ।
डॉ. एमएल मेहरिया, क्षेत्रीय निदेशक, कृषि अनुसंधान केंद्र, मंडोर

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