
पाक विस्थापित परिवार पर नवीनीकरण का 20 हजार का बोझ
जोधपुर। भारतीय नागरिकता और दीर्घ कालीन वीजा के लिए पाक विस्थापित लम्बे समय से संघर्ष कर रहे हैं। लेकिन अब एक और परेशानी का सामना इन दिनों करना पड़ रहा है। दीर्घ कालीन वीजा के लिए अब पासपोर्ट नवीनीकरण की दौड़ लगानी पड़ रही है। एक परिवार पर २० से ५० हजार का भार पड़ रहा है। जबकि विस्थापित परिवार के सदस्य अधिकांश मजदूरी कर जीवन यापन कर रहे हैं।
दरअसल, भारत सरकार ने नियमों में कुछ संशोधन कर ३१ दिसम्बर २०१४ के बाद भारत में आकर बसे लोगों को लॉन्ग टर्म वीजा देने के लिए अब पासपोर्ट नवीनीकरण अनिवार्य कर दिया है। इन दिनों में जोधपुर सहित प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में रहने वाले पाक विस्थापित अधिकांश लोगों के पासपोर्ट अवधि पूर हो चुकी है। एेसे में अब लॉन्ग टर्म वीजा के लिए आवेदन करते हैं तो उसके लिए नवीनीकरण करवाना पड़ता है। पाक उच्चायोग तक पहुंचने और पूरी प्रक्रिया में एक व्यक्ति के पांच हजार तक खर्च हो जाते हैं।
एक साल का नवीनीकरण
पासपोर्ट नवीनीकरण की अवधि एक वर्ष की ही होती है। एेसे में कोई पाक विस्थापित यदि एक साल में लॉन्र्ग टर्ज वीजा या नागरिकता की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाता है तो उसे नए सिरे से पासपोर्ट बनवाना होगा। जिसके लिए उसे पाकिस्तान जाना होगा।
20 हजार लोगों पर भार
पाक विस्थापित अधिकांश लोग मजदूरी करते हैं। राजस्थान में करीब २० हजार लोग करीब इस समस्या से या तो दो-चार हो रहे हैं या आने वाले समय में परेशानी हो सकती है। एक परिवार मे ४ से लेकर १० सदस्य तक होते हैं। एेसे में ५० हजार तक का भार भी इन पर पड़ सकता है।
भारत और पाक सरकार मिलकर काम करें
यह विस्थापितों पर बड़ा भार है। नवीनीकरण की बाध्यता को भारत सरकार समाप्त कर राहत दे सकती है। जबकि पाकिस्तान सरकार के साथ बात कर कुछ नियमों को और शिथिल किया जा सकता है। अधिकांश विस्थापित मजदूर हैं, एेसे में इन खर्च को कम करने पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
- हिंदूसिंह सोढ़ा, अध्यक्ष, सीमांत लोक संगठन
Published on:
25 Dec 2020 06:13 pm
