
INDUSTRY---अनलॉक-2 के 40 दिन: बनी हुई है कामगारों की कमी की समस्या
जोधपुर।
अनलॉक-2 के करीब 40 दिन बाद भी कारखानों मे रौनक नहीं लौटी है। कोरोना का डर बना हुआ है और प्रमुख उद्योग अभी भी कामगारों की कमी से झूंझ रहे है। अनलॉक-2 में कारोबार को तेजी से पटरी पर लाने की कोशिशों के बीच कहीं काम धंधा पूरी तरह से ठप होने के हालात है तो कहीं कारखानों में चौदह घंटे तक भी काम चल रहा है। जोधपुर के हैण्डीक्राफ्ट, स्टील, टेक्सटाइल, स्टोन आदि उद्योगों में उत्पादन की चाल मजदूरों की कमी के कारण पूरी रफ्तार से नहीं चल पा रही है।
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दिनोदिन बढ़ते जा रहे कोरोना संक्रमित भी परेशानी
अमरीका, यूरोप के साथ भारत में भी दिनोदिन कोरोना संक्रमितों की संख्या में बढोतरी हो रही है । इस कारण भी मजदूर डरे हुए है और काम-धंधों की ओर पूरी तरह से नहीं लौट रहे है। काम धंधे की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ रही है, जोधपुर में कोरोना के बढते नए मामलों की वजह से काम में ब्रेक लग जाने की तलवार भी लगातार लटकी हुई है।
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हैण्डीक्राफ्ट उद्योग
- करीब डेढ़ लाख कुल लेबर
- 70 हजार लेबर की अभी भी जरुरत
- 2500 कंटेनर्स आम दिनों में प्रतिमाह निर्यात
- 1000 कंटेनर्स ही गए 40 दिनों में
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परेशानी
- कुशल-अकुशल लेबर की कमी।
- ऑर्डर्स मिल रहे, लेबर की कमी के कारण समय पर पूरे नहीं हो रहे।
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हैण्डीक्राफ्ट उद्योग में प्रोडक्शन व ऑर्डर धीरे-धीरे रफ्तार पकड़ रहे है । मजदुरों की कमी है परन्तु काम समान्य स्थिति की ओर अग्रसर है । एक्सपोर्टर्स के पास नए ऑडर्स है परन्तु पर्याप्त कामगर नहीं होने से प्रोडक्शन की रफ्तार धीमी पड गई है । निर्यात का ग्राफ निसंकोच बढ़ेगा परन्तु प्रोडक्शन में भी तेजी लानी होगी।
राधेश्याम रंगा, वरिष्ठ हैण्डीक्राफ्ट निर्यातक
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टेक्सटाइल उद्योग
- 15 हजार कुल लेबर
- 7 हजार लेबर की जरुरत
- एक्सपोर्ट क्वालिटी का कपडे का कम उत्पादन, मांग नहीं
- डोमेस्टिक मार्केट के अच्छे ऑर्डर है
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परेशानी
- राजस्थान की अकुशल लेबर आ रही है। यूपी-बिहार के लेबर की कमी है।
- ऑर्डर तुलनात्मक रूप से कम है।
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लेबर की परेशानी अभी भी बनी हुई है। जिनके पास ऑर्डर है, वे पर्याप्त लेबर की कमी के कारण ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे। यूपी-बिहार, बंगाल-झारखझड की कुशल लेबर आने पर ही उद्योग को गति मिलेगी।
ज्ञानीराम मालू, एक्जीक्यूटिव ट्रस्टी
जोधपुर प्रदूशण निवारण ट्रस्ट
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स्टील उद्योग
- 15 हजार लेबर जुड़ी है उद्योग से
- 7 हजार लेबर की अभी भी जरुरत
- 30 हजार टन उत्पादन प्रतिमाह (सामान्य दिनों में )
- 5-7 हजार टन उत्पादन (होली के बाद से अब तक)
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परेशानी
- नहीं मिल रहे इंडस्ट्री की नेचर के लेबर
- देश के स्टील के प्रमुख खपत वाले केन्द्रों से बिल्कुल भी मांग नहीं है। इस कारण नए ऑर्डर की कमी है।
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स्टीन उद्योग में अभी करीब 40 प्रतिशत ही लेबर है। देश में स्टेनलेस पाटा की खपत वाले प्रमुख शहरों में लॉकडाउन की वजह से स्टील की मांग बहुत कम हो गई है। जैसे-जैसे मांग बढेगी, लेबर भी वापस आएगी।
जीके गर्ग, पूर्व अध्यक्ष
स्टेनलेस स्टील री-रोलर्स एसेासिएशन
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स्टोन उद्योग
- डेढ लाख लेबर
- 60 हजार लेबर की जरुरत
- 10 हजार टन प्रतिदिन उत्पादन (आम दिनों में )
- 6 हजार टन प्रतिदिन उत्पादन (अनलॉक में)
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परेशानी
- ट्रांसपोर्ट सुविधा नहीं होने के कारण दूरदराज के गांवों से लेबर नहीं आ रही
- कोरोना का डर बना हुआ है, नए ऑर्डर नहीं मिल रहे।
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कोरोना से स्टोन उत्पादन प्रभावित हुआ है। लेबर की कमी है। लेबर आने से काम शुरू हुआ है। लेबर आएगी तो जल्द काम होगा। बारिश के दिन है, खानें पानी से भर जाएगी तो फिर काम नहीं हो पाएगा।
युधिष्ठिर देवड़ा, महासचिव
जोधपुर स्टोन पार्क इंडस्ट्रीज एसोसिएशन
Updated on:
11 Jul 2020 06:48 pm
Published on:
11 Jul 2020 06:48 pm
