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अभिषेक बिस्सा/जोधपुर. शिक्षा विभाग प्रदेश में 50 हजार से अधिक लापता विद्यार्थियों को ढूंढ़ रहा है। ये विद्यार्थी बीच सत्र में विद्यालय छोड़ गए। ये विद्यार्थी कहां गए? शिक्षा विभाग इसका पता लगाने में जुटा है। विभाग के 'आउट ऑफ स्कूल चिल्ड्रन' के जारी ताजा आंकड़ों में यह कड़वी हकीकत सामने आई है। हालांकि शिक्षा विभाग ऐसे बच्चों का पता कर उन्हें विद्यालय से जोडऩे का प्रयास कर रहा है। इनमें कई बच्चे एक से दूसरे स्थान पलायन कर गए हैं। ज्यादातर विद्यार्थी गांवों के हैं, जिनके अभिभावक कृषक हैं। जो खेती कार्य के लिए अन्यत्र चले जाते हैं। बाद में अपने बच्चों का दूसरे विद्यालय में दाखिला नहीं करवाते।
शिक्षा विभाग के प्रदेश में 48 हजार 7 सौ 3 प्रारंभिक शिक्षा सेटअप के विद्यालय हैं। इनमें 53 हजार 283 विद्यार्थी विद्यालय छोड़ अन्यत्र चले गए। जिन्होंने किसी प्रकार की टीसी नहीं कटवाई है। इन्होंने आगे कहां दाखिला लिया है, इस बारे में शिक्षा विभाग के पास कोई जानकारी नहीं है। अधिकारियों का कहना है कि विद्यार्थियों का लगातार पता करवाया जा रहा है। पूरे राजस्थान में साल 2017-18 में 85 हजार 7 सौ 66 विद्यार्थी चिन्हित किए गए थे। जिनमें केवल 32 हजार 4 सौ 83 को विद्यालय लाकर नामांकित किया गया है।
प्रवेशोत्सव का द्वितीय चरण बढ़ाया
ड्रॉप आउट बच्चों व सरकारी विद्यालय में नामांकन बढ़ाने के लिहाज से सरकार ने प्रवेशोत्सव की अंतिम तिथि 3 जुलाई से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है। ताकि शिक्षा विभाग ज्यादा से ज्यादा विद्यार्थियों को सरकारी विद्यालयों से जोड़ सके। इस संबंध में प्रारंभिक शिक्षा निदेशालय ने आदेश जारी कर दिए हैं।
परिवार पलायन की समस्या
आउट ऑफ स्कूल चल रहे बच्चों की सूचना पीईईओ के पास है। प्रवेशोत्सव प्रथम व द्वितीय चरण में जोडऩे का कार्य किया जा रहा है। जोधपुर में समस्या यह है कि काफी बच्चे गांव से पलायन कर गए हैं। यहां पूरा परिवार कृषि कार्य के लिए आता है और कुछ समय काम पूरा कर गांव छोड़ चला जाता है। ऐसे बच्चों के ठहराव के लिए योजना बनाई जा रही है, ताकि ये विद्यार्थी शिक्षा से वंचित न हो।