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पश्चिमी राजस्थान में धोरों की धरती से उठ रहा ड्रग्स का बवंडर

22 माह में पकड़ी एमडी बनाने की 12 लैब, अवैध कारोबार चरम पर, सुनसान रेगिस्तानी इलाकों में ही पनप रहा

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एआई तस्वीर

संदीप पुरोहित
जोधपुर। मारवाड़ की भोगौलिक स्थिति और जनसंख्या का कम घनत्व ड्रग माफिया को रास आ रहा है। रेत के धोरों में एक ड्रग लैब पर कार्रवाई होती तो दूसरी तैयार हो जाती है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) जोधपुर पिछले 22 माह में एमडी ड्रग्स बनाने की 12 लैब पकड़ चुकी है। करोड़ों रुपए की ड्रग्स व केमिकल जब्त किए गए हैं। रेगिस्तान से उठ रहा यह ड्रग्स का बवंडर समय रहते काबू में नहीं लाया गया तो परिणाम विस्फोटक होंगे।

ड्रग्स लैब पकड़ने की बड़ी कार्रवाई

27 अप्रेल 2024 : गुजरात एटीएस की मदद से एनसीबी ने एमडी ड्रग्स बनाने की चार फैक्ट्री पकड़ी थी। 13 जनों को गिरफ्तार कर 22 किलो एमडी ड्रग्स, 124 लीटर लिक्विड ड्रग्स जब्त की
गई थी।
7 दिसम्बर 2025 : गुजरात एटीएस ने शेरगढ़ थानान्तर्गत सोइंतरा गांव के खेत में एमडी ड्रग्स की लैब होने का पता लगाया था। यहां छापा मारकर ड्रग्स की लैब पकड़ी थी, भारी मात्रा में केमिकल व उपकरण पकड़े गए थे।
29 जनवरी : एनसीबी ने सोयला गांव के एक खेत में दबिश देकर ड्रग्स की लैब पकड़ी थी। भारी मात्रा में केमिकल व उपकरण जब्त किए थे। लैब में दो सौ किलो एमडी ड्रग्स बनाने की साजिश थी। शेरगढ़ थाना पुलिस के साथ मिलकर सोइंतरा के एक ट्यूबवेल पर दबिश देकर एमडी ड्रग्स की लैब पकड़ी।

रेगिस्तान पहली पसंद

एमडी ड्रग्स बनाने में घातक केमिकल काम में लिया जाता है। इन्हें हाई टेम्परेचर पर गर्म और मिश्रण किए जाते हैं। इससे केमिकल की तेज दुर्गंध निकलती है। यह इतनी खतरनाक होती है कि इसके उत्पादन के समय आस-पास के लोगों की आंखों व नाक में जलन पैदा हो जाती है। लोगों की तबीयत खराब होने की भी आशंका रहती है। यही वजह है कि ड्रग्स बनाने के लिए माफिया की पहली पसंद पश्चिमी राजस्थान बना हुआ है।

पौने दो साल में एनसीबी की ओर से एमडी ड्रग्स बनाने की 12 लैब पकड़ी जा चुकी है। इनमें से पांच एनसीबी ने और सात पुलिस के साथ संयुक्त कार्रवाई में पकड़ी गई हैं। करोड़ों रुपए की ड्रग्स व केमिकल जब्त किए गए हैं।

  • घनश्याम सोनी, जोनल निदेशक, एनसीबी जोधपुर