
world drug day: नशे की लत से पीडि़त 91 प्रतिशत रोगियों को उचित इलाज नहीं मिल रहा
जोधपुर. नेशनल मेंटल हेल्थ सर्वे 2015-16 के अनुसार भारत में लगभग 22 प्रतिशत लोग नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं। देश में हर 5 में से 1 व्यक्ति तंबाकू का सेवन करता है । शराब भारत में दूसरा सबसे अधिक उपयोग किया जाने वाला नशीला पदार्थ है। भारत में नशे की लत से पीडि़त 91 प्रतिशत रोगियों को उचित इलाज नहीं मिल पा रहा है । ये बात एम्स जोधपुर के मनोचिकित्सा विभाग के सहायक आचार्य डॉ नवरतन सुथार ने कही। विश्वभर में रविवार को नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाएगा।डॉ. सुथार ने बताया कि भारत में मैग्निट्यूट ऑफ़ सब्सटांस यूज़ सर्वे 2019 के अनुसार भारतियों में शराब, कैनाबिस एवं अफिम तीन सबसे मुख्य नशे हैं। सह आचार्य डॉ मुकेश कुमार स्वामी ने बताया की एम्स जोधपुर प्रतिमाह लगभग 100 अफीम की आदत से ग्रसित मरीजों को ओएसटी रूपी इलाज नि:शुल्क उपलब्ध करा रहा हैं । इसके अतिरिक्त शराब, भांग, गांजा, तम्बाकू एवं कुछ एमडी का नशा लेने वाले मरीज भी विभाग में इलाज के लिए आते हैं । विभाग की रेजिडेंट डॉ ईशा अरोडा ने बताया कि नशे की बीमारी (डिपेंडेंस) अन्य शारीरिक बीमारियों में शुगर, हाइपरटेंशन की तरह ही एक लंबे समय तक चलने वाली (क्रोनिक) बीमारी हैं ।
किसी भी नशे से स्वास्थ्य लाभ नहीं
मनोचिकित्सा विभागाध्यक्ष डॉ नरेश नेभिनानी ने बताया कि इस वर्ष की थीम स्वास्थ्य और मानवीय संकटों में नशीली दवाओं से संबंधित चुनौतियों का समाधान है। देश में नशीले पदार्थों के कई सांस्कृतिक संबंध हैं। राजस्थान में अफीम का उपयोग स्वीकार्य माना जाता है और कुछ लोगों का दावा है कि इसके कई स्वास्थ्य लाभ हैं, लेकिन ये बात सच्च नहीं। भांग के उपयोग को भी स्वीकार्य माना जाता है, लेकिन ये भी कई मनोविकृतियों के साथ संबंधित है।
एम्स करेगा कार्यक्रममनोचिकित्सा विभाग की सहायक आचार्य एवं प्रोग्राम्स की आयोजन सचिव डॉ प्रीति के ने बताया कि व्यसन व मनोचिकित्सा में नई प्रगति पर सीएमइ होगी। मनोचिकित्सकों के लिए प्रेरक प्रश्नोत्तरी होगी।
Published on:
25 Jun 2022 08:04 pm
