
थाली में मिलावट: हर तीसरा-चौथा सैंपल जांच में हो रहा फेल
साल 2022 की फैक्ट फाइल
सब स्टैण्डर्ड-52
अनसेफ-7
मिसब्रांड-10
चालान-39----------
बीते तीन वर्षों में यूं मिली मिलावट
वर्ष- इतने नमूने हुए फेल- मिस ब्रांड- सब स्टैण्डर्ड- अनसेफ
2019- 74-20-36-18
2020- 73-21-35-17
2021- 63 -8-41-14
कुल- 210-49-112-49
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जोधपुर. खान-पान के लिए मशहूर जोधपुर में मिलावट का दाग लगातार लग रहा है। गत 8 माह का रिकॉर्ड देखे तो चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के खाद्य सुरक्षा शाखा ने 268 दुकानों से सैंपल लिए हैं। जिसमें 69 सैंपल फेल पाए गए। इस हिसाब विभाग का लिया हुआ हर तीसरा-चौथा सैंपल फेल हुआ है। कुल 25.74 फीसदी सैंपल में मिलावट पाई गई है। जबकि विभाग के पास 18 हजार व्यापारियों के खाद्य लाइसेंस व रजिस्ट्रेशन है। इनमें 12 हजार व्यापारियों ने रजिस्ट्रेशन व 6 हजार व्यापारियों ने लाइसेंस ले रखा हैं। जबकि इनमें 52 खाद्य सामग्री तो पूर्ण रूप से अमानक मिली है। 7 खाद्य आइटम तो बिलकुल खाने में आयोग्य मिले। 10 आइटम मिस ब्रांड कैटेगरी में मिले हैं। चिकित्सा विभाग 39 के खिलाफ संबंधित कोर्ट में चालान पेश कर चुका हैं।
तीन साल में इन प्रकरणों में सजासाल 2013 में एक घी के अनसेफ नमूने के मामले में शहर के एक व्यापारी को दो प्रकरण में साल 2019 में 3 माह की सजा व 25 हजार का जुर्माना लगाया गया। इसी तरह कुछ दिनों पूर्व 6-7 साल पुराने प्रकरणों में जिले के घी, चाय व लाल मिर्च के अनसेफ खाद्य सामग्री आने के मामले में कोर्ट ने छह माह की जेल व व अर्थदंड की सजा सुनाई। उसके बावजूद मिलावटखोरों में कोई सुधार नहीं है। शहर में मिलावटखोरों की संख्या भी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है।
तीन वर्षों में अब पकड़ी हैं सैंपलिंग ने रफ्तार
प्रतिमाह खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को 15 सैंपल लेने पड़ते है। जोधपुर में लंबे समय तक 1 ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी के जिम्मे कार्य था। इस साल का आकलन करे तो विभाग के एक ही खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने 269 सैंपल भरे हैं। हाल ही में विभाग ने तीन और खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को लगाया है। जिसमें दो स्थाई व एक को अतिरिक्त कार्यभार दिया है। कुल मिलाकर विभाग में 4 खाद्य सुरक्षा अधिकारी मिलावट के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।
ये हैं कानून
स्वास्थ्य विभाग प्रकरणों की जांच के पश्चात खाद्य संरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 एवं विनियम 2011 के अन्तर्गत मिथ्याछाप (मिस ब्रांड, जैसे कि पैकिंग व लेबल में गड़बड़ी) प्रकरणों को धारा 52 के अन्तर्गत, अमानक (सब स्टैण्डर्ड, जैसे कि कोई खाद्य सामग्री में तय नियमानुसार वह तत्व नहीं होना ) प्रकरणों को धारा 51 के अन्तर्गत एवं असुरक्षित (खाद्य सामग्री खाने में असुरक्षित)प्रकरणों को धारा 59(1) के अन्तर्गत संबंधित माननीय न्यायालय में पेश किया जाता है। कोई सैंपल सबस्टैण्डर्ड निकलता है तो उसमें पांच लाख, मिस ब्रांड में 3 लाख तक के जुर्माने का प्रावधान है। वहीं अनसेफ पाए जाने पर 6 माह से लेकर 10 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है।
इनमें हैं सर्वाधिक मिलावटजोधपुर में सर्वाधिक मिलावट घी में पाई जा रही है। सर्वाधिक घी की खपत जोधपुर में होती है। इसके अलावा इन दिनों खाद्य तेल, मिर्च-हल्दी सहित अन्य मसालों में भी जमकर मिलावट सामने आ रही है। आगामी त्योहारी सीजन में नकली मावा भी जोधपुर में आने की पूरी संभावना हैं।
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खाद्य सुरक्षा कानून को और मजबूत करने की आवश्यकता
खाद्य सुरक्षा कानून के प्रावधानों को और कड़ा करने की आवश्यकता है ताकि मिलावट पर अंकुश लग सके। कानून की कमियों का लाभ उठाकर मिलावट करने वाले व्यापारी बच निकलते हैं।
- लियाकत अली,सचिव, उपभोक्ता मार्गदर्शन समिति उमस
लगातार चलती है कार्रवाईविभाग लगातार मिलावट प्रकरणों के खिलाफ कार्रवाई कर रहा है। इस साल तो सीमित मैन पॉवर के बावजूद टारगेट से अधिक नमूने लिए हैं। विभाग राज्य सरकार की मंशानुरूप कार्रवाई कर रहा है। मिलावटखोरी किसी सूरत में बर्दाश्त नहीं होगी।
- डॉ. जितेंद्र पुरोहित, सीएमएचओ, जोधपुर
Published on:
08 Sept 2022 10:14 pm
