9 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

अधिवक्ताओं ने माह के अंतिम कार्य दिवस पर किया न्यायिक कार्यों का बहिष्कार

- एकीकृत हाईकोर्ट की मांग- 42 वर्ष से जारी अधिवक्ताओं का आंदोलन
less than 1 minute read
Google source verification
Advocates on the last working day of the month boycott judicial work

अधिवक्ताओं ने माह के अंतिम कार्य दिवस पर किया न्यायिक कार्यों का बहिष्कार

जोधपुर.

राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan Highcourt) और 45 अधीनस्थ न्यायालयों के चार हजार से अधिक अधिवक्ताओं ने एकीकृत हाईकोर्ट (unified highcourt) की मांग को लेकर महीने के अन्तिम कार्य दिवस पर न्यायिक कार्यों का बहिष्कार किया। बहिष्कार के चलते वकीलों ने कोर्ट में उपस्थिति नहीं दी। इस दौरान न्यायालयों में बयान और जिरह प्रभावित हुई और केवल जमानत, रिमाण्ड जैसे जरुरी कामकाज निपटाए गए।

धरने पर बैठे अधिवक्ता

राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट ऐसोशिएशन (rajasthan highcourt assosiation) के अध्यक्ष रणजीत जोशी और लायर्स ऐसोशिएशन के अध्यक्ष सुनील जोशी के नेतृत्व में अधिवक्ताओं ने लाइब्रेरी के बाहर धरना दिया।

42 वर्ष से चल रही हड़ताल

वर्ष 1977 से एकीकृत हाईकोर्ट की मांग को लेकर प्रत्येक महीने के अन्तिम कार्यदिवस पर अधिवक्ताओं द्वारा न्यायिक कार्यो का बहिष्कार किया जा रहा है। वरिष्ठ अधिवक्ताओं के अनुसार वकीलों की यह हड़ताल देश में चलने वाली सबसे लम्बी अवधि की हड़ताल बनती जा रही है। जोधपुर के वकील ४२ वर्ष में पाँच सौ दिन से अधिक न्यायिक कार्य दिवस का बहिष्कार कर चुके हैं। हाईकोर्ट की सलाह पर वर्ष 1977 में सरकार (state govt. of rajasthan) ने राजस्थान हाईकोर्ट के दो टुकड़े कर इसकी एक खंडपीठ जयपुर में स्थापित कर दी। इसके पीछे यह तर्क यह दिया गया कि जोधपुर प्रदेश के कई जिलों से काफी दूर पड़ता है। भौगोलिक परिस्थितियां से यह ठीक होगा पर जोधपुर के वकीलों ने तभी से इस निर्णय का विरोध कर रहे हैं।

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग