9 अगस्त 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

घर से भागने के बाद ट्रेन का सहारा, एक साल में मिले 400 बच्चे

- स्टेशन पर बच्चों की सहायता कर रही रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क - प्रदेश में केवल 4 स्टेशन पर ही कर रही काय
2 min read
Google source verification

जोधपुर

image

Amit Dave

May 14, 2019

jodhpur

घर से भागने के बाद ट्रेन का सहारा, एक साल में मिले 400 बच्चे

जोधपुर

प्रदेश में हर दिन औसत एक बच्चा जो अपना घर छोड़ कर आता है फिर अपनों से मिलाया जाता है। एक साल में ऐसे 400 से ज्यादा बच्चे सामने आए हैं जिनका घर छोडऩे का कारण कहीं अपहरण है तो कहीं बहलाना-फुसलाना है। ये बच्चे मिले हैं रेलवे स्टेशन पर काम करने वाली चाइल्ड हेल्प डेस्क को, जिनके आंकड़े बताते हैं कि कैसे बच्चों की तस्करी के लिए रेल एक प्रमुख साधन बनता जा रहा है। रेलवे स्टेशन पर आए इस प्रकार के बच्चों के बेहतर पुनवज़्सन के लिए काम कर रही चाइल्ड हेल्प डेस्क। ग्राम विकास सेवा संस्थान की ओर से जोधपुर रेलवे स्टेशन पर अप्रेल 2018 से रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क अस्तित्व में आई। राष्ट्रीय स्तर पर रेलवे बोडज़् से जुड़ी चाइल्ड इंडिया फाउण्डेशन है, जो बच्चों के लिए काम करने वाली अनुभवी संस्थाओं को ही यह जिम्मेदारी देती है। जोधपुर में चाइल्ड हेल्प डेस्क में 3 महिलाओं सहित 12 का स्टाफ है। प्रदेश में जोधपुर के अलावा जयपुर, अजमेर और बीकानेर में ही रेलवे चाइल्ड हेल्प डेस्क बनी हुई है।

-

पहले बालश्रम, अब घर से भागकर आने वालों में लड़कियां ज्यादा

विभिन्न मामलों पर नजर डाले तो पहले बालश्रम के लिए तस्करी कर लाने वाले, भीख मांगने के लिए बच्चें ज्यादा आते थे। हाल ही के महिनों में घर से भागकर आने वाले बच्चों के मामले ज्यादा हुए है, इनमें भी लड़कियों की संख्या ज्यादा है। इसके अलावा गुम होने वाले, अगवा करने, माता-पिता द्वारा स्टेशन पर छोड़कर चले जाने के मामले भी हुए है। यहां पूरे देश के बच्चे आ रहे है। जिन्हें चाइल्ड हेल्प डेस्क अपनी निगरानी में रख कायज़्वाही करता है।

--

आंकड़े एक नजर में

घर से भागे----- 143

बाल श्रम--- 84

भावनात्मक सहायता व मागज़्दशज़्न- 85

भिक्षावृत्ति- 46

गुमशुदा- 67

-----------

कुल--- 425

-----------

ऐसे काम करती चाइल्ड हेल्प डेस्क

- टीम के लोग रेलवे प्लेटफॉमज़् पर घूमते रहते है। ट्रेनों में निगरानी रखते है।

- संदिग्ध दिखने वाले, अकेले, डरे-सहमे, किसी अनजान के पीछे-पीछे चलते रहने, बार-बार चक्कर काटने सहित असामान्य गतिविधि करने वाले बच्चे को स्टेशन पर बने बूथ पर लाते है।

- बूथ पर महिला काउंसलर बच्चे से परिचय व अकेले आने का कारण पूछती है।

- बच्चे के माता-पिता से संपकज़् करने व नजदीकी स्थान से होने और 4-5 घंटे घंटे में आने की स्थिति में रेलवे स्टेशन पर रिटायरिंग रूम में रखते है।

- जवाब नहीं देने की स्थिति में बच्चे को रेलवे की बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करते है। जहां से मेडिकल करवाने के बाद लड़के को किशोर गृह व लड़की को बालिका गृह भेज दिया जाता है। वहां पर उनके माता-पिता नहीं आने तक रखा जाता है।

-

रेलवे का सहयोग

आरपीएफ, जीआरपी, रेलवे स्टेशन पर कायज़्रत स्टाफ, सफाईकमीज़्, स्टेशन निदेशक नारायणलाल का हमारे कायज़् में पूरा सहयोग है।

मोहनलाल मोदी, कॉडिज़्नेटरचाइल्ड हेल्प डेस्क, जोधपुर

---

रेलवे स्टेशन पर किन्हीं कारणों से आए बच्चों के लिए बेहतर पुनवज़्सन के लिए काम कर रहे है। इसमें हमारी टीम 24 घंटे सजग रहकर कायज़् कर रही है।

मनोहरलाल चौधरी, निदेशकग्राम विकास सेवा संस्थान

बड़ी खबरें

View All

जोधपुर

राजस्थान न्यूज़

ट्रेंडिंग