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बालाकोट जैसी एयर स्ट्राइक अब होगी आसान, पता नहीं चलेगा किस देश के लड़ाकू विमान थे

- डीआरडीओ जोधपुर सुपर चैफ टेक्नोलॉजी विकसित करने में जुटा- लड़ाकू विमान को पूरा ढक लेगा फाइबर, राडार कुछ भी नहीं देख सकेगा, दुश्मन देश में मिसाइल व बम की तरह छोड़ा जाएंगे फाइबर्स- दुनिया में अब तक किसी भी देश के पास नहीं है तकनीक
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बालाकोट जैसी एयर स्ट्राइक अब होगी आसान, पता नहीं चलेगा किस देश के लड़ाकू विमान थे

बालाकोट जैसी एयर स्ट्राइक अब होगी आसान, पता नहीं चलेगा किस देश के लड़ाकू विमान थे

जोधपुर. अमरीका व रूस सहित समूचे विश्व की वायुसेना इस समय सुपर चैफ टेक्नोलॉजी विकसित करने में जुटी है। भारतीय वायुसेना भी इस दौड़ में शामिल है। भारत में इसकी कमान रक्षा अनुसंधान एवं वैज्ञानिक संगठन (डीआरडीओ) यानी रक्षा प्रयोगशाला जोधपुर कर रहा है। सुपर चैफ टेक्नोलॉजी के बाद बालाकोटा जैसे एयर स्ट्राइक काफी आसान होगी। दुनिया में अब तक बना कोई भी राडार पता नहीं लगा पाएगा कि लड़ाकू विमान कब और कहां आए और कैसे निकल गए। संभवत: अगले दो साल में भारत यह तकनीक विकसित करके सबसे शक्तिशाली वायुसेना बना लेगा।

इस समय लड़ाकू विमान सहित हवा में उड़ती हुई कोई भी चीज को राडार अपनी माइक्रोवेव तरंगों से पहचान लेता है और प्रतिक्रिया स्वरूप उस पर राडार जनित मिसाइल से हमला करके हवा में ही नष्ट कर देता है। राडार से लड़ाकू विमानों को बचाने के लिए पूरे विश्व की वायुसेना इस समय चैफ टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर रही है। इसमें राडार विमान को देखने के बाद उस पर मिसाइल हमला तो करता है लेकिन चैफ जैसे अदृश्य बादलों के कारण मिसाइल रास्ता भटक जाती है और विमान बच जाता है। चैफ का इस्तेमाल करने के लिए लड़ाकू विमान के पायलट को बहुत कम समय मिलता है। साथ ही कई मिसाइल हमलों में उसका बचना संभव नहीं होता है।

क्या है सुपर चैफ टेक्नोलॉजी
इस तकनीक में हवा में ऐसे चैफ फाइबर्स छोड़े जाएंगे जो राडार की माइक्रोवेव तरंगों को परावर्तित करने की बजाय उसको अवशोषित कर लेंगे। ये फाइबर्स करोड़ों की संख्या में अधिक समय तक हवा में तैरते रहेंगे ताकि राडार से लगातार आने वाली माइक्रोवेव को सोखते रहें। एक तरह यह लड़ाकू विमान को पूरा ढक लेगा। इस दौरान विमान दुश्मन देश की वायु सीमा में दाखिल हो जाएगा। राडार इसे देख नहीं पाएगा और विमान अपना काम करके निकल जाएगा।

मिसाइल अथवा बम की तरह फायर करना होगा
एडवांस चैफ फाइबर्स को लड़ाकू विमान से मिसाइल अथवा बम की तरफ फायर करना होगा। धमाके से एक साथ निकले करोड़ों फाइबर्स एक सुरक्षित गलियारा बना लेंगे। लगातार आगे बढऩे के लिए एडवांस चैफ फाइबर्स की लगातार फायरिंग करनी पड़ेगी। इसी गलियारे से लड़ाकू विमान गुजरता रहेगा। राडार पर स्क्रीन साफ होने अथवा किसी तरह के सिग्नेचर नहीं होने से किसी भी देश के पास यह सबूत नहीं रहेगा कि किसी अन्य देश के लड़ाकू विमानों ने उसकी सीमा में घुसपैठ की है।

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